Student Protest : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ प्रशासन ने बाउंड ओवर की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों को एसडीएम कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से रोजगार और शिक्षक भर्ती में अवसर देने की मांग कर रहे हैं।


पांच छात्रों को जारी किया गया नोटिस
जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे छात्रों में से पांच को एसडीएम की ओर से नोटिस भेजा गया है। नोटिस के जरिए छात्रों से छह महीने तक शांति बनाए रखने को लेकर जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने प्रत्येक छात्र से 50-50 हजार रुपये की प्रतिभूति वाले बंधपत्र को लेकर अपना पक्ष रखने को कहा है। इस कार्रवाई के लिए छात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब देने का अवसर दिया गया है।

18 अगस्त को एसडीएम के सामने पेश होने का निर्देश
नोटिस प्राप्त करने वाले पांच छात्रों को 18 अगस्त को एसडीएम के समक्ष पेश होने के लिए बुलाया गया है। छात्रों को बाउंड ओवर की कार्रवाई के संबंध में अपना जवाब और पक्ष रखने के लिए उपस्थित होना होगा। प्रशासन की ओर से की जा रही इस कार्रवाई को लेकर छात्रों के बीच चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि आंदोलन के बाद इस तरह का नोटिस मिलने से उन पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
छह महीने तक शांति बनाए रखने की शर्त
प्रशासन की ओर से छात्रों से छह महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रतिभूति वाले बंधपत्र को लेकर जवाब मांगा गया है। बाउंड ओवर की प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति से भविष्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने का आश्वासन लिया जाता है। अब छात्रों को एसडीएम के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि वे इस प्रक्रिया के संबंध में क्या कहना चाहते हैं।
छात्रों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
नोटिस मिलने के बाद छात्रों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी विवाद या हिंसा के लिए नहीं, बल्कि रोजगार और शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर था। उनका कहना है कि वे सरकार से खाली पदों पर भर्ती और युवाओं को रोजगार का अवसर देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ बाउंड ओवर जैसी कार्रवाई किए जाने से छात्र असमंजस में हैं।

‘नौकरी मांगना क्या गलत है?’
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रदेश में युवाओं के सामने पहले से ही रोजगार का संकट है। ऐसे हालात में जब छात्र अपने भविष्य को लेकर सरकार के सामने अपनी मांग रखते हैं तो उन पर कार्रवाई का दबाव बनाया जाना उचित नहीं है। छात्रों का सवाल है कि यदि वे शांतिपूर्ण तरीके से नौकरी और शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे हैं तो इसमें आखिर गलत क्या है? उनका कहना है कि आंदोलन के जरिए वे अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
भर्ती प्रक्रिया और रोजगार को लेकर बढ़ी चिंता
शिक्षक भर्ती की मांग कर रहे छात्रों के बीच रोजगार को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षक भर्ती में अवसर मिलने की उम्मीद लगाए बैठे छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से उन्हें रोजगार का रास्ता मिल सकता है। इसी मांग को लेकर वे प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
पांच छात्रों को नोटिस जारी होने के बाद शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी चर्चा में आ गया है। एक ओर छात्र अपनी भर्ती संबंधी मांग पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाउंड ओवर की प्रक्रिया शुरू की है। फिलहाल 18 अगस्त को होने वाली सुनवाई में छात्रों का पक्ष सामने आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
छात्रों की अगली रणनीति पर नजर
नोटिस मिलने के बाद छात्रों की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर भी नजर बनी हुई है। छात्र अपनी भर्ती की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से शांति व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। अब 18 अगस्त को एसडीएम के समक्ष छात्रों की पेशी के बाद इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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