Durg Police Brutality
Durg Police Brutality: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। भिलाई के छावनी थाना क्षेत्र में दो पुलिस आरक्षकों (कॉन्स्टेबल) पर भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के भाई के साथ मारपीट करने और दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी सरेआम अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते नजर आ रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली और आम नागरिकों के प्रति उनके व्यवहार पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
पूरा मामला 12 मार्च की रात का है, जब पावर हाउस रेलवे स्टेशन के पास राजनांदगांव के भाजपा नेता आनंद साहू के छोटे भाई नागेश साहू अपने काम के सिलसिले में खड़े थे। तभी छावनी थाने में तैनात दो कॉन्स्टेबल, लव पांडेय और राकेश चौधरी, वहां पहुंचे। आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी अनावश्यक रूप से लोगों को वहां से भगाने लगे। जब नागेश अपनी जगह से नहीं हटे, तो आरक्षक राकेश चौधरी ने हाथ में पकड़ी हुई बंदूक को उल्टा किया और उसके बट से नागेश पर हमला कर दिया। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मी ने नागेश का कॉलर पकड़कर उन्हें पीछे धकेला, जबकि अन्य लोगों से वे सामान्य रूप से हाथ मिलाते देखे गए।
पीड़ित नागेश के बड़े भाई आनंद साहू, जो भाजपा किसान मोर्चा राजनांदगांव के जिला उपाध्यक्ष और प्रदेश साहू संघ के सदस्य हैं, ने पुलिस पर ‘गुंडागर्दी’ करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि नागेश राजनांदगांव में ढाबा चलाता है और भिलाई में अपने एक पूर्व कर्मचारी से बकाया पैसे लेने गया था। आनंद साहू के अनुसार, उनके भाई ने बताया कि पुलिसकर्मियों के शर्ट के बटन खुले हुए थे और वे संभवतः नशे की हालत में थे। भाजपा नेता ने कहा कि उनका भाई कोई अपराधी नहीं था जो पुलिस को देखकर भागता, फिर भी उसके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया गया। उन्होंने इस मामले में दुर्ग एसपी से मिलकर सख्त कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।
इस पूरे प्रकरण में पुलिस नियमों की अनदेखी का भी बड़ा मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, उस रात दोनों कॉन्स्टेबलों की ड्यूटी पावर हाउस स्थित सराफा बाजार में लगाई गई थी। पुलिस नियमावली के अनुसार, किसी भी जवान को अपना आवंटित ‘पॉइंट’ छोड़कर दूसरे क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं होती है, जब तक कि कोई आपातकालीन स्थिति न हो। इसके बावजूद, ये दोनों सिपाही सराफा बाजार छोड़कर रेलवे स्टेशन पहुंच गए और वहां मौजूद आम नागरिकों को खदेड़ने लगे। ड्यूटी में इस तरह की लापरवाही अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती है।
हालांकि घटना का वीडियो साक्ष्यों के साथ सामने आ चुका है और भाजपा नेता ने गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन दुर्ग पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस का काम नागरिकों की सुरक्षा करना है, न कि उन्हें डराना या बिना किसी अपराध के उनके साथ मारपीट करना। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप और सीसीटीवी फुटेज के दबाव के कारण आने वाले दिनों में संबंधित पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होने की प्रबल संभावना है।
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