Durga Puja 2025 : पश्चिम बंगाल में इस साल दुर्गा पूजा पहले से कहीं ज्यादा भव्य रूप में मनाई जा रही है। पूरे राज्य में करीब 45 हजार से अधिक दुर्गा पंडाल सजाए गए हैं, जिनमें से केवल कोलकाता में ही 3100 पंडाल बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन सभी पंडालों के लिए 1.10 लाख रुपये प्रति पंडाल का अनुदान घोषित किया है। इस तरह राज्य सरकार पर कुल 500 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा।
ममता सरकार ने पहली बार 2018 में दुर्गा पूजा पंडालों को अनुदान देना शुरू किया था। उस समय राज्य में 28 हजार पंडाल थे और प्रत्येक को 10 हजार रुपये दिए जाते थे। लेकिन अब पंडालों की संख्या 60% बढ़कर 45 हजार से ऊपर हो चुकी है और अनुदान 11 गुना बढ़कर 1.10 लाख रुपये तक पहुंच गया है। पिछले साल यह राशि 85 हजार रुपये थी, जबकि इस बार सीधे 25 हजार रुपये की वृद्धि की गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बंगाल की अर्थव्यवस्था के लिए दुर्गा पूजा महज धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ है। कलकत्ता विश्वविद्यालय के इकोनॉमिक्स विभाग के एचओडी पंचानन दास का कहना है कि यह 10 दिनी उत्सव छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगों तक सभी के लिए आय का बड़ा स्रोत है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल नवरात्र के दौरान 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ था। इस बार अनुमान है कि यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, क्योंकि इस बार पंडालों की संख्या और खर्च दोनों में इजाफा हुआ है। पूजा कमेटियों का कहना है कि बीते सात वर्षों में लेबर, कच्चा माल, लाइटिंग, पूजन सामग्री और सजावट की लागत 60% से ज्यादा बढ़ चुकी है, जिसकी भरपाई के लिए अधिक अनुदान जरूरी है।
हालांकि, विपक्षी दल भाजपा ने ममता सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता और संतोष मित्रा स्क्वॉयर पंडाल के आयोजक सजल घोष का कहना है कि उनकी कमेटी सरकार का अनुदान नहीं लेती, क्योंकि सरकार इसे राजनीतिक प्रचार का मंच बना चुकी है। उनका आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ममता ने इस साल अनुदान में 25 हजार रुपये की वृद्धि की है।
दूसरी ओर, विधानसभा अध्यक्ष और तृणमूल नेता बिमान बनर्जी का कहना है कि सरकार किसी भी राजनीतिक भेदभाव के बिना सभी पंडालों को अनुदान देती है। यहां तक कि कोलकाता के 4-5 बड़े भाजपा समर्थित पंडालों को भी राज्य सरकार ने अनुदान की पेशकश की है।
स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों से गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। जहां एक ओर ममता बनर्जी इसे बंगाल की संस्कृति और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बता रही हैं, वहीं भाजपा इसे चुनावी लाभ उठाने की रणनीति मान रही है।
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