DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में DUSU चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लेकर शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन से कई सवाल किए। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों के उल्लंघन और हिंसा को गंभीरता से लेते हुए चुनाव के बाद विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी।
140 उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को नोटिस
हाई कोर्ट ने DUSU चुनाव लड़ने वाले सभी 140 उम्मीदवारों और संबंधित छात्र संगठनों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उनसे दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। उम्मीदवारों और संगठनों को यह बताना होगा कि चुनाव से जुड़े नुकसान के लिए उनसे हर्जाना क्यों न वसूला जाए। अदालत ने संकेत दिया कि सार्वजनिक और विश्वविद्यालय की संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के काफिले पर सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नॉर्थ दिल्ली के DCP से बिना नंबर प्लेट और उम्मीदवारों के नाम वाले वाहनों के काफिले को लेकर सवाल किया। अदालत ने कहा कि तस्वीरों में करीब 10 से 20 वाहनों का काफिला दिखाई दे रहा है, जबकि कुछ उम्मीदवार वाहनों की छत और बोनट पर खड़े नजर आ रहे हैं। कोर्ट ने पूछा कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद ऐसे काफिलों को आगे बढ़ने की अनुमति कैसे मिली।
पुलिस ने वाहन जांच और कार्रवाई की जानकारी दी
DCP नॉर्थ ने अदालत को बताया कि पुलिस लगातार वाहनों की जांच कर रही है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जा रही है। अदालत ने कहा कि इस तरह के काफिलों से आम लोगों में भय और दबदबे की भावना पैदा हो सकती है। कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए।
हिंसा के मामलों में छह FIR दर्ज
अदालत को बताया गया कि चुनाव से जुड़ी घटनाओं को लेकर अब तक छह FIR दर्ज की गई हैं और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वीडियो फुटेज में नजर आने वाले अन्य लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित वाहनों की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC जब्त करने की कार्रवाई की बात भी अदालत के सामने रखी गई। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान की कार्रवाई भी की गई है।
शिक्षक पर हमले को लेकर भी पुलिस से जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव के दौरान एक शिक्षक पर हुए कथित हमले को लेकर भी पुलिस से सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि मामले में गिरफ्तार व्यक्ति छात्र है या नहीं और इस कार्रवाई की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी गई या नहीं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि संबंधित छात्रों के खिलाफ कॉलेज स्तर पर क्या कदम उठाए गए। DU प्रशासन ने बताया कि संबंधित छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
चुनावी हिंसा पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि चुनाव से जुड़ी ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं और हालात में पर्याप्त बदलाव दिखाई नहीं देता। अदालत ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद किसी शिक्षक के साथ हिंसक व्यवहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जीत के बाद छात्र में विनम्रता होनी चाहिए। इससे पहले अदालत ने पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने पर मतगणना और नतीजों की घोषणा पर रोक की संभावना भी जताई थी।
लिंगदोह समिति के नियमों के उल्लंघन पर चिंता
अदालत ने कहा कि DUSU चुनाव के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों का कथित तौर पर बार-बार उल्लंघन हुआ है। कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन केवल उम्मीदवारों ही नहीं, बल्कि छात्रों और छात्र संगठनों को भी करना होगा। अदालत ने चुनावी नुकसान के लिए छात्र संगठनों की जवाबदेही तय करने की संभावना पर भी विचार किया है।
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के निर्देश
हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों को सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। नगर निगम सहित संबंधित अधिकारियों से कहा गया कि किसी भी तरह की तोड़फोड़ या नुकसान होने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से रोकथाम के उपाय करने पर जोर दिया।
छात्रों के नाम पर नियम तोड़ने की छूट नहीं
अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्र होने के आधार पर कानून और नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पुलिस को हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और अन्य नियमों के उल्लंघन के मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अब उम्मीदवारों और छात्र संगठनों के जवाब के बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।
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