Diwali 2026 : दिवाली का त्योहार इस साल 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, रंग-बिरंगी लाइटों से सजावट करते हैं और दीप जलाकर खुशियां मनाते हैं। दिवाली की शाम प्रदोष काल में धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी तथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
कैसी होनी चाहिए मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति?
दिवाली से पहले बाजारों में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की खरीदारी शुरू हो जाती है। अगर आप भी इस बार नई प्रतिमा घर लाने की तैयारी कर रहे हैं, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. लक्ष्मी और गणेश की अलग-अलग मूर्तियां खरीदें
मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं अलग-अलग होनी चाहिए। दोनों की जुड़ी हुई मूर्तियों के बजाय स्वतंत्र प्रतिमाएं खरीदना शुभ माना जाता है।

2. बैठी हुई मुद्रा वाली प्रतिमाएं चुनें
दिवाली पूजन के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्तियां खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे स्थिरता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
3. मिट्टी या धातु की मूर्ति को दें प्राथमिकता
पूजा के लिए मिट्टी, सोना, चांदी या पीतल से बनी प्रतिमाएं खरीदी जा सकती हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, प्लास्टर ऑफ पेरिस और सीमेंट से बनी मूर्तियों से बचने की सलाह दी जाती है।

4. गणेश जी की सूंड और मूषक का रखें ध्यान
भगवान गणेश की मूर्ति खरीदते समय उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होने की मान्यता का ध्यान रखा जाता है। प्रतिमा में उनके हाथ में मोदक और पास में उनका वाहन मूषक भी होना शुभ माना जाता है।
5. मां लक्ष्मी का स्वरूप कैसा होना चाहिए?
मां लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा चुनें, जिसमें वे कमल के फूल पर विराजमान हों। उनके हाथों से धन की वर्षा या आशीर्वाद की मुद्रा दिखाई देना शुभ माना जाता है। धार्मिक परंपरा में उल्लू पर विराजमान प्रतिमा के बजाय कमल पर बैठी प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है।
6. खंडित मूर्ति खरीदने से बचें
मूर्ति खरीदते समय अच्छी तरह जांच लें कि उसमें कहीं दरार, टूट-फूट या कोई हिस्सा गायब तो नहीं है। पूजा के लिए साफ और साबुत प्रतिमा चुननी चाहिए।
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापना के जरूरी नियम
नई प्रतिमाएं खरीदने के बाद उनकी स्थापना भी श्रद्धापूर्वक करनी चाहिए। परंपरा के अनुसार, मां लक्ष्मी को भगवान गणेश के दाहिनी ओर स्थापित किया जाता है। सामने से देखने पर मां लक्ष्मी गणेश जी के बाईं तरफ दिखाई देती हैं। मूर्तियों का मुख पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। गणेश जी के साथ मूषक और मां लक्ष्मी के साथ उल्लू या हाथी का स्वरूप भी धार्मिक प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का क्या करें?
अगर घर में पहले से पुरानी मिट्टी की मूर्तियां रखी हैं, तो उनका सम्मानपूर्वक निस्तारण करना चाहिए। इन्हें साफ पानी से भरे पात्र में विसर्जित करके उस पानी को पौधों या गमले में डाला जा सकता है। धातु की पुरानी मूर्तियों को गंगाजल या साफ पानी से शुद्ध करके दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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