Earthquake Himachal : हिमाचल प्रदेश की धरती सोमवार सुबह भूकंप के झटकों से कांप उठी। धर्मशाला क्षेत्र में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.9 मापी गई। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, झटके सुबह करीब 9:30 बजे महसूस किए गए और लगभग तीन बार धरती हिली। हालांकि भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन झटके लगते ही लोग एहतियातन अपने घरों से बाहर निकल आए।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा जिला भूकंप की दृष्टि से सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। इस क्षेत्र में भूकंप के झटके अक्सर दर्ज किए जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से भी यहां कई बार बड़े पैमाने पर नुकसानदायक भूकंप आ चुके हैं। हिमाचल प्रदेश को भूकंप की दृष्टि से जोन-5 में रखा गया है। यह श्रेणी उन क्षेत्रों के लिए है जहां कभी भी बड़ा भूकंप भारी तबाही मचा सकता है। पहाड़ी भौगोलिक संरचना और सतह के नीचे सक्रिय टेक्टॉनिक प्लेट्स इस जोखिम को और बढ़ा देती हैं।
पिछले कुछ दिनों से भारत के विभिन्न हिस्सों में लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। रविवार (17 अगस्त) को राजस्थान के चुरु में 3.1 और सिक्किम में 2.8 तीव्रता का भूकंप आया था। आज सुबह ही असम के नौगांव में 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। शनिवार रात को अफगानिस्तान में 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। वहीं, हाल ही में जापान और इंडोनेशिया के सुलावेसी में 5.7 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। कुछ ही दिन पहले रूस में 8 से ज्यादा तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसके चलते जापान समेत कई देशों में सुनामी आई और भारी तबाही मची।
धरती की सतह के नीचे सात बड़ी टेक्टॉनिक प्लेट्स मौजूद हैं। ये प्लेट्स लगातार हिलती-डुलती रहती हैं और कई बार एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। टकराने से उत्पन्न ऊर्जा जब तरंगों के रूप में बाहर निकलती है, तो धरती कांप उठती है। यही प्रक्रिया भूकंप कहलाती है। जिन इलाकों के ऊपर ये प्लेट्स टकराती हैं, वहां भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है। पहाड़ी क्षेत्रों में यह खतरा और भी ज्यादा होता है क्योंकि वहां की सतह अपेक्षाकृत नाजुक होती है।
भूकंप की तीव्रता चाहे कम क्यों न हो, यह लोगों में डर और चिंता पैदा कर देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप की भविष्यवाणी पहले से करना संभव नहीं है, इसलिए संवेदनशील इलाकों के लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
झटके लगते ही तुरंत खुले स्थान पर चले जाएं।
इमारत, पेड़ या बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखें।
घर में हों तो किसी मजबूत टेबल या दरवाजे के फ्रेम के नीचे शरण लें।
लिफ्ट का उपयोग न करें।
धर्मशाला में आया यह हल्का भूकंप भले ही किसी बड़े नुकसान का कारण नहीं बना, लेकिन इसने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य भूकंप के खतरे के साए में रहते हैं। हाल के दिनों में देश और पड़ोसी देशों में आए लगातार भूकंप इस बात का संकेत हैं कि हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए और आपदा प्रबंधन की रूपरेखा को मजबूत बनाना होगा।
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