EC on Rahul Gandhi : बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग वोट चोरी कर रहा है। हमारे पास ठोस सबूत हैं। अगर ये सबूत सार्वजनिक हुए तो चुनाव आयोग को छिपने की जगह नहीं मिलेगी।” संसद में दिए गए बयान में उन्होंने यह भी कहा कि इस चोरी में आयोग के शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक के कर्मचारी शामिल हैं।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया: बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना बयान
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। आयोग ने कहा कि वह रोजाना मिलने वाले “बेबुनियाद आरोपों” को नजरअंदाज करता है और चुनावकर्मियों से भी ऐसा ही करने को कहा गया है। आयोग ने जोर देकर कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने के लिए इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं।

आयोग ने राहुल को पत्र और मेल भेजने का दावा किया
चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि उसने राहुल गांधी को 12 जून 2025 को ईमेल भेजा था, जिसमें किसी मुद्दे पर संवाद की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। उसी दिन उन्हें एक पत्र भी भेजा गया, जिसका भी कोई जवाब नहीं आया। आयोग के अनुसार, राहुल ने अब तक किसी भी मुद्दे पर लिखित रूप में कोई शिकायत नहीं की है, जिससे उनकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
आयोग बोला:संस्थाओं को बदनाम करना
चुनाव आयोग ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप “बेतुके” हैं और अब बात सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि आयोग के कर्मचारियों को धमकाया भी जा रहा है। आयोग ने ऐसे प्रयासों को लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करार दिया है।
राहुल का दावा: जांच से हुआ बड़ा खुलासा
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव और फिर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी देखी। उनके मुताबिक, महाराष्ट्र में अंतिम मतदाता सूची में अचानक एक करोड़ नए नाम जोड़ दिए गए। जब चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की, तब कांग्रेस ने अपनी स्वतंत्र जांच शुरू की, जिसमें “परमाणु बम” जैसे खुलासे हुए हैं।
टकराव की ओर बढ़ता विपक्ष बनाम संस्थाएं विवाद
राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच यह टकराव लोकसभा चुनावों के बाद विपक्ष के आक्रामक रुख का हिस्सा माना जा रहा है। जहां राहुल चुनाव आयोग पर निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग अपने बचाव में पारदर्शिता की दुहाई दे रहा है। आने वाले समय में यह मामला और गर्मा सकता है, खासकर अगर कांग्रेस अपने कथित सबूत सार्वजनिक करती है।










