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ECI Notice Ex-Navy: पूर्व नेवी चीफ को चुनाव आयोग का नोटिस, डेटा मिलान न होने पर ECI ने दी सफाई

ECI Notice Ex-Navy: भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (रिटायर्ड), जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक और वीर चक्र विजेता हैं, हाल ही में एक प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गए। चुनाव आयोग (ECI) ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया के तहत उन्हें और उनकी पत्नी को एक नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें अपनी पहचान साबित करने के लिए बुलाया गया था। सेवानिवृत्ति के बाद गोवा में रह रहे एक शीर्ष सैन्य अधिकारी को इस तरह का नोटिस मिलने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और सशस्त्र बलों के पूर्व कर्मियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

चुनाव आयोग का आधिकारिक स्पष्टीकरण: तकनीकी खामी बनी वजह

विवाद बढ़ता देख इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर डॉ. मेडोरा एरमोमिला डी कोस्टा ने सोमवार (12 जनवरी 2026) को एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह नोटिस किसी व्यक्ति विशेष को लक्षित करके नहीं भेजा गया था, बल्कि यह एक स्वचालित सिस्टम-आधारित प्रक्रिया का हिस्सा था। स्पष्टीकरण के अनुसार, कोर्टालिम विधानसभा क्षेत्र के बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) द्वारा जमा किए गए ‘कैलकुलेशन फॉर्म’ में कुछ अनिवार्य विवरणों की कमी थी, जिसके कारण सिस्टम डेटा का मिलान नहीं कर सका।

नोटिस भेजने का तकनीकी कारण: ‘अनमैप्ड कैटेगरी’ में गया फॉर्म

अधिकारी ने बताया कि एडमिरल प्रकाश द्वारा भरे गए फॉर्म में पिछले एसआईआर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जैसे मतदाता का नाम, ईपीआईसी (EPIC) नंबर, भाग संख्या और मतदाता सूची की क्रम संख्या शामिल नहीं थी। इन पहचान विवरणों के अभाव में, चुनाव आयोग का डिजिटल डेटाबेस मौजूदा वोटर लिस्ट और नए फॉर्म के बीच ‘ऑटोमेटिक कनेक्शन’ स्थापित करने में विफल रहा। इसी वजह से सिस्टम ने उनके आवेदन को ‘अनमैप्ड कैटेगरी’ (अवर्गीकृत श्रेणी) में डाल दिया, जिससे सत्यापन के लिए नोटिस स्वतः उत्पन्न हो गया।

एडमिरल अरुण प्रकाश की प्रतिक्रिया: “हम कानून का पालन करेंगे”

पूर्व नौसेना प्रमुख ने इस पूरे मामले पर बेहद गरिमामय रुख अपनाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर स्पष्ट किया कि उन्हें किसी विशेष सुविधा की आवश्यकता नहीं है और न ही उन्होंने कभी ऐसी मांग की है। उन्होंने कहा, “मैंने और मेरी पत्नी ने आवश्यकतानुसार फॉर्म भरा था और गोवा की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देखकर हम संतुष्ट थे। फिर भी, हम चुनाव आयोग के नोटिस का सम्मान करेंगे और प्रक्रिया का पालन करेंगे।” उनके इस जवाब ने अनावश्यक विवाद को शांत करने में बड़ी भूमिका निभाई।

एसआईआर प्रक्रिया और सत्यापन की अनिवार्यता

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि बीएलओ एप्लिकेशन को इस तरह से बनाया गया है कि वह केवल पूर्ण विवरण भरे जाने पर ही स्वचालित मिलान करता है। यदि डेटा का मिलान नहीं हो पाता है, तो ‘सुनवाई तंत्र’ (Hearing Mechanism) के माध्यम से भौतिक सत्यापन अनिवार्य हो जाता है। डी कोस्टा ने जोर देकर कहा कि मतदाता की पात्रता की पुष्टि करने और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देने के लिए ही यह मानक प्रक्रिया अपनाई गई थी।

डिजिटल सिस्टम और मानवीय निरीक्षण की जरूरत

यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल गवर्नेंस में छोटी सी तकनीकी चूक भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है। हालांकि चुनाव आयोग ने इसे एक रूटीन प्रक्रिया बताया है, लेकिन भविष्य में ऐसे प्रतिष्ठित नागरिकों और वरिष्ठ अधिकारियों के मामलों में अतिरिक्त मानवीय निरीक्षण (Manual Oversight) की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

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