ED raid Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई स्थित घर पर छापा मारा, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में जोरदार विरोध की तैयारी कर ली है। इस छापेमारी को लेकर सदन में हंगामे के पूरे आसार हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस विधायक प्रश्नकाल के दौरान ईडी की कार्रवाई का मजबूती से विरोध करेंगे। पार्टी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए विधानसभा में जोरदार प्रदर्शन की योजना बनाई है। विधानसभा का यह अंतिम दिन है, जहां कई विभागों से जुड़े वार्षिक प्रतिवेदन और योजनाओं पर चर्चा होनी है, लेकिन ईडी रेड ने सत्र को विवादों के घेरे में ला दिया है।
आज के दिन विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा विभिन्न विभागों के वार्षिक प्रतिवेदन पेश किए जाने हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना, खराब सड़कों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लगाए हैं। लेकिन ईडी रेड की वजह से ये मुद्दे हाशिए पर जा सकते हैं।
गुरुवार को भी विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ। डीएपी खाद की आपूर्ति को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार प्राइवेट कंपनियों को खाद दे रही है, जिससे किसान वंचित हो रहे हैं। इस मुद्दे पर सदन में तीखी नारेबाजी हुई।
हंगामे के दौरान कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के गर्भगृह में पहुंचकर प्रदर्शन किया। बार-बार समझाने के बावजूद जब वे वापस नहीं लौटे, तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “25 साल पुरानी परंपरा को तोड़ा जा रहा है, संसदीय मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।” इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए रोकी गई, लेकिन पांच मिनट बाद दोबारा शुरू कर दी गई। हालांकि तब तक माहौल पूरी तरह से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझ चुका था। माना जा रहा है कि ईडी छापेमारी के बाद आज का दिन और भी तूफानी हो सकता है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र अपने अंतिम दिन विवाद और विरोध की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। भूपेश बघेल के घर ईडी की रेड ने कांग्रेस को आक्रोशित कर दिया है, और अब सत्र के दौरान संसदीय मर्यादा और राजनीतिक टकराव के बीच संतुलन बनाना विधानसभा अध्यक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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