ED Raid in Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (DC) शांतनु सिन्हा बिस्वास के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की है। शांतनु सिन्हा का फ्लैट दक्षिण कोलकाता के पॉश इलाके बल्लीगंज स्थित फर्न रोड पर है। इसके साथ ही जांच टीम सन एंटरप्राइज के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय कामदार के बेहाला स्थित आवास पर भी पहुंची है। इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी ने प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
ED की टीम ने अपनी रणनीति के तहत रविवार सुबह लगभग 6:30 बजे शांतनु सिन्हा बिस्वास और जॉय कामदार के आवासों पर एक साथ दस्तक दी। शांतनु सिन्हा बिस्वास की पृष्ठभूमि की बात करें तो वह लंबे समय तक प्रभावशाली कालीघाट पुलिस स्टेशन के प्रभारी (IC) रह चुके हैं। ईडी अधिकारियों के पहुंचते ही उनके आवास को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया और उनसे सघन पूछताछ शुरू कर दी गई। गौरतलब है कि इससे पहले भी इस पुलिस अधिकारी का नाम कोयला तस्करी घोटाले में सामने आया था, जिसके सिलसिले में उन्हें पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया गया था।
ED की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज एक मामले से जुड़ी हुई है। अब तक एजेंसी ने कुल तीन परिसरों की तलाशी ली है, जिनमें से दो ठिकाने शांतनु सिन्हा बिस्वास के हैं और एक जॉय कामदार का। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा प्रकरण स्थानीय अपराधी ‘सोना पप्पू’ के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का विस्तार है। पप्पू पर हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने और जबरन वसूली जैसे कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और केंद्रीय एजेंसी अब उन प्रभावशाली लोगों की तलाश कर रही है जो इस अपराधी को संरक्षण दे रहे थे।
सोना पप्पू दक्षिण कोलकाता के कस्बा और बल्लीगंज जैसे इलाकों में अपनी आपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात है। उस पर दर्जनों एफआईआर दर्ज हैं और वह फरवरी में हुए चर्चित गोलपार्क गैंगवार का मुख्य आरोपी भी है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वह लंबे समय से कोलकाता पुलिस की गिरफ्त से बाहर बना हुआ है। ईडी की वर्तमान जांच इसी कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही है कि क्या पुलिस विभाग के कुछ प्रभावशाली अधिकारी उसे गिरफ्तारी से बचने में मदद कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि पप्पू रियल एस्टेट और निर्माण कंपनियों से करोड़ों रुपये की उगाही करता था। ईडी का आरोप है कि इस उगाही की रकम का एक बड़ा हिस्सा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था। इससे पहले 1 अप्रैल को हुई छापेमारी में ईडी ने 1.47 करोड़ रुपये की नकदी, 67.64 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और एक देसी रिवॉल्वर बरामद की थी। ईडी ने 9 अप्रैल को स्पष्ट किया था कि आरोपी बंगाल में एक संगठित आपराधिक गिरोह चला रहे थे, जिसके जरिए अवैध धन जुटाया जा रहा था। फिलहाल पप्पू फरार है और उसने एजेंसी के समन का भी जवाब नहीं दिया है।
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