Women's Reservation Bill
Women’s Reservation Bill : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर थी, तो उसे इस विधेयक को धरातल पर उतारने के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ा? ममता ने तंज कसते हुए कहा कि सितंबर 2023 में विधेयक पारित होने के बाद लगभग तीन साल तक केंद्र हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा, लेकिन अब जब कई राज्यों में चुनाव नजदीक हैं, तो इसे अचानक चुनावी स्टंट की तरह पेश किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने इस विधेयक को परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया से जोड़ने के केंद्र के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण को परिसीमन की शर्त के साथ जोड़ना महिलाओं के साथ धोखा है। उन्होंने सवाल किया कि इसे इतनी जल्दी और बिना किसी स्पष्ट रोडमैप के क्यों पारित किया गया? टीएमसी प्रमुख के अनुसार, यह महिलाओं को अधिकार देने के बजाय देश के चुनावी मानचित्र को अपने फायदे के लिए बदलने की एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस दशकों से महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ती रही है और उन्हें भाजपा जैसे दल से महिला सम्मान पर “उपदेश” सुनने की आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए उन्हें संसद में आकर चर्चा करने की चुनौती दी। ममता ने कहा, “प्रधानमंत्री जी, अगली बार जब आप राष्ट्र को संबोधित करना चाहें, तो टीवी कैमरों के बजाय संसद के पटल से ऐसा करने का साहस दिखाएं।” उन्होंने तर्क दिया कि संसद वह स्थान है जहाँ प्रधानमंत्री को विपक्ष की जांच, चुनौती और जवाबदेही के दायरे में रहना पड़ता है। ममता बनर्जी ने पीएम के हालिया कदमों को संसदीय गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि देश को संबोधित करने के बजाय उन्हें सदन के भीतर उठ रहे सवालों के जवाब देने चाहिए।
अपने संबोधन के दौरान ममता बनर्जी काफी आक्रामक नजर आईं। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को ‘कायरतापूर्ण’ और ‘पाखंडी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दोहरी चाल चल रही है क्योंकि उसे अब एहसास हो गया है कि सत्ता उसके हाथों से फिसल रही है। ममता ने दावा किया कि आगामी चुनावों में संभावित हार के डर से ही सरकार इस तरह के लोकलुभावन लेकिन पेचीदा विधेयक लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल न तो महिलाओं का सम्मान करना जानता है और न ही लोकतंत्र की मर्यादाओं को समझता है।
ममता बनर्जी ने अंत में यह दोहराया कि उनकी पार्टी हमेशा से महिला सशक्तिकरण की पक्षधर रही है और इसके लिए किसी बाहरी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बंगाल ने हमेशा देश को दिशा दिखाई है और यहाँ महिलाओं को राजनीति और समाज में उचित स्थान दिया गया है। उन्होंने संकल्प लिया कि टीएमसी केंद्र की हर उस ‘साजिश’ का विरोध करेगी जो संवैधानिक संस्थाओं और जनता के अधिकारों को कमजोर करती है। ममता के इस कड़े रुख ने आने वाले चुनावी मौसम में केंद्र और राज्य के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।
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