Ration Scam ED Raid
Ration Scam ED Raid : पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा अपने चरम पर है। प्रथम चरण का मतदान संपन्न हो चुका है और दूसरे चरण के लिए प्रचार अभियान जोरों पर है। इसी राजनीतिक गहमागहमी के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता और बर्धमान सहित कई जिलों में एक साथ छापेमारी कर राज्य की सियासत में तहलका मचा दिया है। यह कार्रवाई सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में हुई भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर की गई है।
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कोलकाता, बर्धमान और उत्तर 24 परगना के हाबरा इलाके में एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी की। जानकारी के अनुसार, ईडी के निशाने पर मुख्य रूप से अनाज के सप्लायर्स और एक्सपोर्टर्स हैं, जो राशन वितरण प्रणाली से जुड़े हुए हैं। सुबह सवेरे शुरू हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी में अधिकारियों ने दस्तावेजों को खंगाला और डिजिटल साक्ष्यों को अपने कब्जे में लिया।
यह पूरा मामला साल 2020 में दर्ज हुई एक एफआईआर से जुड़ा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल पुलिस ने बशीरहाट पुलिस स्टेशन में यह मामला दर्ज किया था। यह शिकायत घोझाडांगा एलसीएस (LCS) के सीमा शुल्क उपायुक्त द्वारा की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित किए गए गेहूं की भारी मात्रा में कालाबाजारी और हेराफेरी की गई है। लगभग छह साल पहले शुरू हुई इस कानूनी प्रक्रिया ने अब ईडी की एंट्री के साथ एक नया मोड़ ले लिया है।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने सरकारी अनाज को हड़पने के लिए बेहद शातिर योजना बनाई थी। बिचौलियों, सप्लायर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने आपस में सांठगांठ कर जरूरतमंदों के लिए आए गेहूं को बाजार से भी कम भाव पर ‘कागजी’ तौर पर खरीदा और फिर उसे गुप्त स्थानों पर डंप कर दिया। अपनी पहचान छिपाने के लिए उन्होंने गेहूं की बोरियों को बदल दिया या उन्हें पलट दिया, ताकि यह पता न चल सके कि यह राशन की दुकानों (PDS) के लिए आवंटित सरकारी अनाज है।
इस घोटाले का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जो अनाज गरीब और जरूरतमंद लोगों की आजीविका का सहारा था, उसे ऊंचे दामों पर खुले बाजार में बेच दिया गया। आरोपियों ने इस अवैध व्यापार के जरिए करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया। इस पूरे खेल में किसी को भनक तक नहीं लगने दी गई कि राशन कार्ड धारकों का हक छीना जा रहा है। अब ईडी इस मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए जुटाए गए धन के स्रोत और इसके पीछे के ‘सफेदपोश’ चेहरों की तलाश कर रही है।
ईडी की इस कार्रवाई ने चुनाव के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। जहाँ विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं राज्य की सत्ताधारी पार्टी इसे केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करार दे रही है। हालांकि, अभी तक किसी भी अधिकारी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। जांच एजेंसी की यह सक्रियता संकेत दे रही है कि राशन घोटाले की जड़ें बहुत गहरी हैं।
वर्तमान में छापेमारी की प्रक्रिया जारी है और ईडी के अधिकारी जब्त किए गए दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं। इस मामले में कई निर्यातकों के विदेशों से जुड़े तार भी खंगाले जा रहे हैं। यदि हेराफेरी के सबूत पुख्ता पाए जाते हैं, तो जल्द ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। बंगाल की जनता अब यह देख रही है कि चुनावी वादों के बीच भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों का ऊंट किस करवट बैठता है।
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