Dattatreya Hosabale
Dattatreya Hosabale : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान भारतीय प्रवासियों और वैश्विक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण विजन पेश किया है। वॉशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशों में रह रहे भारतीयों को न केवल अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए, बल्कि जिस देश में वे रह रहे हैं, वहां के प्रति पूर्ण निष्ठा और वफादारी भी निभानी चाहिए।
दत्तात्रेय होसबोले ने भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे जिस भी देश में निवास कर रहे हैं, वहां के एक आदर्श नागरिक बनें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रवासी भारतीयों को उस राष्ट्र के प्रति पूरी तरह वफादार होना चाहिए जिसने उन्हें करियर, रोजी-रोटी और विकास के अवसर दिए हैं। होसबोले के अनुसार, हिंदू समाज को स्थानीय जीवन के हर पहलू—चाहे वह नेतृत्व हो, समाजसेवा हो या पेशेवर उत्कृष्टता—में अपनी सार्थकता सिद्ध करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीयों की मेहनत और आचरण ऐसा होना चाहिए कि वे स्थानीय लोगों का दिल जीत सकें।
अपनी अमेरिकी यात्रा के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए होसबोले ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य आरएसएस के बारे में फैली गलतफहमियों को दूर करना है। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कई दशकों से संगठन के खिलाफ एक सुनियोजित दुष्प्रचार चलाया गया है, जिससे पश्चिमी देशों में संघ की एक विकृत छवि बनी है। होसबोले ने कहा, “अब तक संघ इस दर्शन पर काम करता था कि हमारा काम ही हमारा संदेश है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपनी बात सीधे लोगों तक पहुँचाएं। हमारा संदेश अब केवल कार्यों से ही नहीं, बल्कि संवाद से भी दुनिया तक पहुँचना चाहिए।”
पश्चिमी मीडिया और शैक्षणिक जगत में संघ को अक्सर ‘हिंदू वर्चस्ववादी’ या ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ के रूप में चित्रित किया जाता रहा है। होसबोले ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पश्चिमी देशों में संघ को महिला विरोधी और वर्चस्ववादी बताने वाली भ्रांतियां दशकों से फैलाई गई हैं। ब्रिटेन और अमेरिका के अपने हालिया दौरों में उन्होंने बुद्धिजीवियों, नीति विशेषज्ञों और विचारकों से मिलकर यह स्पष्ट किया कि संघ वास्तव में किन मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर होसबोले ने एक बड़ी जिम्मेदारी का उल्लेख किया—भारत और हिंदू संस्कृति के बारे में गढ़े गए गलत नैरेटिव को बदलना। उन्होंने कहा कि देश के भीतर और बाहर, भारत की छवि को लंबे समय से धुंधला करने का प्रयास किया गया है। अब संघ का ध्यान इस ओर है कि हिंदू संस्कृति की सही और गौरवशाली तस्वीर पेश की जाए। उन्होंने खुशी जाहिर की कि संघ से बाहर के लोग भी अब इस मिशन में जुड़ रहे हैं और समाज के विभिन्न वर्गों तक सही जानकारी पहुँचाने की आवश्यकता है।
होसबोले की इस यात्रा को संघ के ‘संपर्क अभियान’ के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि संघ समावेशी मूल्यों में विश्वास रखता है और चाहता है कि वैश्विक स्तर पर हिंदू समाज एक नेतृत्वकारी भूमिका निभाए। उनका यह दौरा न केवल संगठनात्मक विस्तार के लिए है, बल्कि दुनिया के सामने एक आधुनिक और प्रगतिशील भारत की छवि रखने का एक प्रयास भी है। प्रवासियों को दिए गए उनके संदेश ने यह साफ कर दिया कि भारतीय संस्कृति सार्वभौमिक भाईचारे और जिस भूमि पर आप रह रहे हैं, उसके प्रति सम्मान सिखाती है।
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