Election Commission SRO
Election Commission SRO: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने शुक्रवार को घोषणा की कि 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह प्रक्रिया निष्पक्ष और त्रुटि रहित मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग जिन प्रमुख क्षेत्रों में यह SIR करा रहा है, उनमें छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, और लक्षद्वीप शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया के अवलोकन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख राज्यों में विशेष रोल पर्यवेक्षकों (Special Roll Observers – SRO) की तैनाती की है।
जिन राज्यों में SRO की नियुक्ति की गई है, वे हैं:
पश्चिम बंगाल
तमिलनाडु
उत्तर प्रदेश
गुजरात
केरल
मध्य प्रदेश
छत्तीसगढ़
राजस्थान
विशेष रोल पर्यवेक्षकों (SRO) ने अपना काम शुरू कर दिया है। इनसे अपेक्षा है कि वे फरवरी 2026 में अंतिम मतदाता सूचियों के प्रकाशन तक इन राज्यों में सप्ताह में दो दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। SRO की उपस्थिति पूरी संशोधन प्रक्रिया पर बारीकी से नज़र रखने और उसमें पारदर्शिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
SRO की भूमिका केवल पर्यवेक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सहभागी प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी। SRO सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के राज्य स्तरीय और ज़िला स्तरीय नेतृत्व के साथ बैठकें करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य राजनीतिक दलों के साथ समन्वय स्थापित करना और उनके किसी भी संदेह या सुझाव को सुनना है, ताकि पूरी प्रक्रिया में सभी हितधारकों का विश्वास बना रहे।
इसके अतिरिक्त, SRO राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEOs) और मतदाता सूची आयुक्तों के साथ भी बैठकों में व्यक्तिगत रूप से या आभासी (virtually) रूप से भाग लेंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि SIR की पूरी प्रक्रिया सुचारू, पारदर्शी और सहभागी तरीके से पूरी हो।
SRO की तैनाती का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों में होने वाली त्रुटियों को न्यूनतम करना है। SRO, SIR की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि:
कोई भी पात्र मतदाता सूचियों में शामिल होने से छूट न जाए।
कोई भी अपात्र व्यक्ति या फ़र्ज़ी नाम मतदाता सूची में शामिल न हो जाए।
यह कदम आने वाले चुनावों के लिए एक सटीक और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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