Electricity bill scheme : छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की बहुप्रशंसित “बिजली बिल हाफ” योजना को समाप्त किए जाने से प्रदेश में राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। 1 अगस्त से प्रभावी इस फैसले के बाद आम उपभोक्ताओं को हर महीने औसतन ₹1000 तक की अतिरिक्त आर्थिक burden उठानी पड़ेगी। कांग्रेस ने इस कदम को जनविरोधी और व्यापारी वर्ग के हितों को साधने वाला करार दिया है।
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि उसके 19 महीने के कार्यकाल में प्रदेशवासियों को बिजली के मोर्चे पर लगातार तीन बड़े झटके लगे हैं – प्रति यूनिट 80 पैसे की बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर लगाने की योजना और अब बिजली बिल हाफ योजना की समाप्ति। इन तीनों निर्णयों को कांग्रेस ने आम जनता की सुविधाओं पर हमला बताया है।
ऊर्जा विभाग ने योजना को समाप्त करने का आदेश 3 अगस्त को, यानी एक अवकाश दिवस पर चुपचाप जारी किया। “बिजली बिल हाफ” योजना के तहत पहले 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं को औसतन ₹1000 तक की छूट दी जाती थी। पहले इस सीमा को घटाकर 100 यूनिट किया गया और अब योजना पूरी तरह बंद कर दी गई है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री टीएस सिंहदेव ने कांग्रेस शासनकाल में इस योजना का विस्तार किया था। उन्होंने यह सुनिश्चित किया था कि यदि कोई उपभोक्ता छह महीने तक बिल नहीं चुका पाया हो, तब भी वह योजना के लाभ से वंचित नहीं होगा। अब इस योजना की समाप्ति को सिंहदेव ने जनहित के विरुद्ध बताया है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा सरकार बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। टीएस सिंहदेव ने कहा, “यह सरकार जनहित के बजाय व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दे रही है। इसी कारण जनता से सब्सिडी छीनकर महंगी बिजली थोपने का काम किया जा रहा है।”
पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने ट्वीट कर कटाक्ष किया – “पहले स्मार्ट मीटर से बिल बढ़ाया सांय-सांय, अब बिजली बिल हाफ योजना गई बाय-बाय।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने बिजली में राहत देते हुए भी राजस्व में बढ़ोतरी की थी, लेकिन भाजपा सरकार न केवल जेब काट रही है, बल्कि सेवाएं भी घटा रही है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, पीसीसी उपाध्यक्ष जेपी श्रीवास्तव, पूर्व सभापति अजय अग्रवाल, नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद, महामंत्री द्वितेन्द्र मिश्रा और पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने सरकार के इस निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। उनके संयुक्त बयान में कहा गया, “भाजपा सरकार जनहित की योजनाएं खत्म कर किसी उद्योगपति वर्ग के हितों को साध रही है। ये निर्णय जनता पर महंगाई का करंट छोड़ने जैसे हैं।”
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