Elon Musk vs Donald Trump: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और स्पेस-एक्स व टेस्ला के सर्वेसर्वा एलन मस्क एक बार फिर अपनी बेबाक बयानबाजी के कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में हैं। इस बार उनके निशाने पर कोई और नहीं, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी महत्वाकांक्षी योजना ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) है। दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 के एक सत्र के दौरान मस्क ने इस नाम का मजाक उड़ाते हुए कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी। मस्क के इस बयान ने न केवल वहां मौजूद दिग्गजों को हंसने पर मजबूर कर दिया, बल्कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
एलन मस्क ने दावोस के मंच से कहा कि जब उन्होंने पहली बार ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के बारे में सुना, तो उन्हें लगा कि शायद इसमें शब्दों का कोई खेल छिपा है। मस्क ने तंज कसते हुए कहा, “मुझे लगा कि यह ‘Peace’ (शांति) वाला बोर्ड नहीं, बल्कि ‘Piece’ (टुकड़ा) वाला बोर्ड हो सकता है।” उनका इशारा इस ओर था कि यह बोर्ड शायद वैश्विक शांति स्थापित करने के बजाय, विभिन्न देशों या क्षेत्रों के बीच जमीन के टुकड़ों (Pieces of Land) के बंटवारे या कूटनीतिक समझौतों के तहत भू-भाग देने से संबंधित हो सकता है। मस्क का यह भाषाई कटाक्ष सीधे तौर पर ट्रंप की उन नीतियों पर प्रहार माना जा रहा है जिसमें वे अक्सर ‘डील्स’ के जरिए विवाद सुलझाने की बात करते हैं।
हालांकि कई लोग मस्क की इस टिप्पणी को महज एक हल्के-फुल्के मजाक या ‘मस्क स्टाइल’ के रूप में देख रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे इतनी सहजता से नहीं ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मस्क का यह बयान ट्रंप की विदेश नीति और उनकी विवादित ‘पीस प्लान’ पहलों पर एक सोची-समझी प्रतिक्रिया हो सकती है। एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप के रिश्ते हमेशा से ही किसी रोलर-कोस्टर राइड की तरह रहे हैं। कभी दोनों एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार नजर आते हैं, तो कभी मस्क सार्वजनिक मंचों से ट्रंप के फैसलों की बखिया उधेड़ देते हैं। यह नया बयान दोनों दिग्गजों के बीच आने वाले समय में नए वैचारिक टकराव का संकेत दे रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब एलन मस्क ने अमेरिकी सरकार या उसके शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाए हों। मस्क खुद को एक ‘फ्री स्पीच एब्सोल्यूटिस्ट’ कहते हैं और वे अक्सर जो बाइडन से लेकर डोनाल्ड ट्रंप तक, हर किसी की नीतियों पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ या सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपनी राय बेबाकी से रखते रहे हैं। मस्क का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है; वे अब एक राजनीतिक शक्ति के रूप में भी उभर रहे हैं। उनके इस ताजा बयान के बाद वॉशिंगटन में राजनीतिक बहस छिड़ गई है कि क्या ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वास्तव में शांति स्थापित करने के लिए है या यह केवल कूटनीतिक सौदेबाजी का एक नया नाम है।
जैसे-जैसे 2026 की वैश्विक चुनौतियां बढ़ रही हैं, एलन मस्क जैसे प्रभावशाली उद्योगपति का राष्ट्रपति की योजनाओं पर व्यंग्य करना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पहल का उद्देश्य यूक्रेन-रूस या मध्य पूर्व जैसे संघर्षों में मध्यस्थता करना बताया जा रहा है। लेकिन मस्क के इस तंज ने दुनिया के सामने एक नया नजरिया पेश कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि व्हाइट हाउस मस्क के इस ‘पीस बनाम पीस’ वाले मजाक पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या इससे टेस्ला या मस्क के अन्य व्यवसायों पर कोई राजनीतिक प्रभाव पड़ता है।
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