India US Defence Framework: दुनिया भर की महाशक्तियों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत और अमेरिका ने 10 साल के बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस करार को दोनों देशों के बीच रणनीतिक तालमेल और बढ़ती सुरक्षा साझेदारी का संकेत बताया। समझौते पर दस्तखत मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुए, जहां अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेठ भी मौजूद थे।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर तनातनी रही है। हाल ही में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया था। ऐसे में यह डिफेंस डील दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिशों का हिस्सा मानी जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समझौते के बाद ट्विटर पर लिखा कि यह हमारी मजबूत रक्षा साझेदारी में एक नए युग की शुरुआत है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह 10 वर्षीय रक्षा करार भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में बड़े बदलाव और नीतिगत दिशा तय करेगा। उन्होंने इसे बढ़ती रणनीतिक समन्वय का प्रतीक और साझेदारी के एक नए दशक की शुरुआत बताया। उनका कहना था कि “रक्षा संबंध हमारे द्विपक्षीय रिश्तों का मजबूत आधार स्तंभ हैं। यह समझौता हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में स्वतंत्र, मुक्त और कानूनों पर आधारित नौवहन को सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।”
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेठ ने भी इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत अब रक्षा क्षेत्र में सहयोग, तकनीकी और सूचनाओं के आदान-प्रदान को और बढ़ा रहे हैं। उनका कहना था कि “हमारे रक्षा संबंध इतने मजबूत कभी नहीं रहे हैं।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता न केवल भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और अन्य महाशक्तियों के बढ़ते प्रभाव के बीच संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगा। कुआलालंपुर में आसियान सदस्य देशों की बैठक के दौरान यह द्विपक्षीय समझौता हुआ, जिससे यह क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा रणनीति में भी नई दिशा प्रदान करेगा।
इस रक्षा समझौते के तहत दोनों देश सैन्य प्रशिक्षण, हथियार प्रणाली, साझा सुरक्षा तकनीक और समुद्री निगरानी में सहयोग करेंगे। इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री रणनीति को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, यह अमेरिका के लिए भी भारत के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत में सामरिक संतुलन कायम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले दशकों में यह रक्षा साझेदारी दोनों देशों के रणनीतिक हितों और क्षेत्रीय स्थिरता में बड़ा योगदान देगी।भारत-अमेरिका के बीच यह 10 साल का रक्षा समझौता केवल द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत में सशक्त और स्थिर सुरक्षा ढांचे का आधार भी साबित होगा।
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