Engineers Day : इंजीनियर अब केवल सिस्टम के निर्माता नहीं रहे, बल्कि संभावनाओं के नए आर्किटेक्ट बन गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर एआई-संचालित व्यवसायों तक, इंजीनियरिंग का दायरा अब समस्या समाधान से कहीं आगे बढ़कर भविष्य के टिकाऊ और समावेशी विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

भारत में हर साल लगभग 1.5 मिलियन इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स कामकाजी दुनिया में कदम रखते हैं, जो सड़कों, रेलवे, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नवीनतम तकनीकों के विकास में योगदान देते हैं। उनकी मेहनत देश की आर्थिक प्रगति को गति देती है और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार आधारशिला रखती है।

एआई: इंजीनियरिंग में क्रांति का कारक
बिरलासॉफ्ट के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सेल्वाकुमारन मानप्पन के अनुसार, “इंजीनियरों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। AI ने डिजाइन के चक्रों को हफ्तों से घटाकर घंटों तक लाकर उद्योगों में स्थिरता और लचीलापन बढ़ाने में मदद की है।” डिजिटल ट्विन्स और सिमुलेशन्स के जरिए भविष्यवाणी करने वाले इंजीनियर आज जीवनचक्र का अनुकूलन करते हुए परिसंपत्तियों और प्लेटफॉर्म को अधिक टिकाऊ बना रहे हैं।
समस्या हल करने से लेकर ऑर्केस्ट्रेटर तक
एनकोरा की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सोनाली कोचर कहती हैं, “इंजीनियर केवल अलग-अलग समस्याओं का समाधान नहीं करते, बल्कि ऐसे सिस्टम डिजाइन करते हैं जो बदलाव के सामने टिकाऊ, लचीले और स्केलेबल हों। AI एजेंट उनके डिजिटल सहयोगी बन गए हैं, जो नवाचार को तेज करते हैं और इंजीनियरों को नैतिकता और डिज़ाइन पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाते हैं।”
नैतिकता और उद्देश्य के साथ सिस्टम निर्माण
ग्रेट लर्निंग के सह-संस्थापक हरि कृष्णन नायर के अनुसार, “इंजीनियरिंग का अर्थ अब केवल समस्या समाधान नहीं रहा। यह ऐसे सिस्टम बनाने का काम है जो समावेशी, टिकाऊ और नैतिक हो। प्रत्येक डिज़ाइन में दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव और निष्पक्षता को शामिल करना अनिवार्य है।”
नवाचार का पैमाना
एमफेसिस के ग्लोबल डिलीवरी हेड रवि वसन्ट्राज बताते हैं कि कैसे इंजीनियर AI-संचालित प्लेटफॉर्म जैसे NeoZeta और NeoCrux का उपयोग कर उद्योगों को मजबूत कर रहे हैं। “उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा टिकाऊ, समावेशी भविष्य के निर्माण में सहायक है।”
सीटियसटेक की CHRO सौम्या संथोष कहती हैं, “हर कोड की लाइन स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार ला सकती है और जीवन बचा सकती है। उनका काम उद्देश्यपूर्ण और मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।”
स्थिरता की दिशा में इंजीनियरिंग
माइंडस्प्रिंट के वीपी बालासुब्रमणियन कुमारप्पन के अनुसार, इंजीनियर तीन मुख्य आयामों पर ध्यान देते हैं: दीर्घायु और प्रभाव के लिए वास्तुकला, नैतिकता, पारदर्शिता और समावेशन को सुनिश्चित करना, तथा AI, IoT, ब्लॉकचेन जैसे तकनीकों से संसाधनों का संरक्षण।
अल्टिमेट्रिक के COO राजीव जैन कहते हैं, “इंजीनियर समाज के प्रगति की दिशा तय करते हैं। वे नवाचार के जरिए संसाधनों की सुरक्षा, लागत में कमी और समावेशी विकास सुनिश्चित कर सकते हैं।”
मानव-केंद्रित भविष्य की ओर
इंडेजीन के VP डॉ. विशाल शाह कहते हैं, “इंजीनियर बड़ी चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन और तकनीकी व्यवधानों को स्थायी परिणामों में बदलने की क्षमता रखते हैं।” सोनाली कोचर कहती हैं, “सततता न केवल व्यापार बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सही संस्कृति और उपकरणों के साथ इंजीनियर दीर्घकालिक मूल्य निर्माण कर सकते हैं।” इंजीनियर्स डे 2025 पर यह स्पष्ट हो गया है कि इंजीनियर अब केवल समस्या सुलझाने वाले नहीं, बल्कि एक सतत और भविष्य के लिए तैयार दुनिया के वास्तुकार हैं। उनकी मेहनत और नवाचार तकनीक को मानवता की सेवा में बदल रहे हैं, जिससे हमारा कल बेहतर और सुरक्षित बन रहा है।
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