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EU Blacklists IRGC: तेहरान को तगड़ा झटका! यूरोपीय संघ ने अब IRGC को माना ‘आतंकी संगठन’

EU Blacklists IRGC: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने एक बेहद सख्त और दूरगामी फैसला लिया है। यूरोपीय संघ ने ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य शाखा, ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) को अपनी आधिकारिक आतंकवादी सूची में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस कदम के साथ ही IRGC अब अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हमास जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों की श्रेणी में खड़ा हो गया है। यूरोपीय कमीशन की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि जो संगठन आतंक की राह चुनता है, उसके साथ दुनिया को आतंकी जैसा ही व्यवहार करना चाहिए।

मानवाधिकारों का हनन और 6000 से अधिक मौतें

काजा कल्लास ने कड़े शब्दों में कहा कि IRGC ने ईरान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 6373 बेगुनाह लोगों की हत्या की है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया कि मानवाधिकारों के ऐसे क्रूर दमन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कल्लास के अनुसार, “अगर आपकी कार्यप्रणाली आतंकवादियों जैसी है, तो आप पर प्रतिबंध भी उसी आधार पर लगाए जाएंगे।” इस फैसले के बाद अब IRGC के सदस्यों पर न केवल यात्रा प्रतिबंध लगेंगे, बल्कि यूरोपीय देशों में मौजूद उनकी संपत्तियों (Assets) को भी फ्रीज कर दिया जाएगा।

फ्रांस का बदला हुआ रुख और सदस्य देशों की एकजुटता

इस बड़े फैसले को अमली जामा पहनाने के लिए यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों की सहमति अनिवार्य थी। पहले फ्रांस इस कदम का विरोध कर रहा था, क्योंकि उसे डर था कि इससे ईरान के साथ कूटनीतिक रास्ते बंद हो जाएंगे और वहां फंसे फ्रांसीसी नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हालांकि, अब फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के दमनकारी रवैये का जवाब देना जरूरी है और अपराधों के लिए कोई माफी नहीं दी जा सकती। जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे प्रमुख यूरोपीय देश पहले से ही इस कार्रवाई के पक्ष में थे।

IRGC: ईरान की शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र

ईरान के लिए IRGC सिर्फ एक सेना नहीं, बल्कि सत्ता की रीढ़ है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद आयतुल्लाह खुमैनी ने इसकी स्थापना की थी। यह नियमित सेना से पूरी तरह अलग है और सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करती है। ईरान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर IRGC का गहरा प्रभाव है। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले ही इसे आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं, और अब यूरोपीय संघ के इस फैसले से ईरान वैश्विक स्तर पर और अधिक अलग-थलग पड़ जाएगा।

रूस के साथ बढ़ती नजदीकी और पश्चिमी दबाव

यूरोपीय संघ का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान खुलकर रूस का समर्थन कर रहा है और पश्चिम विरोधी नीतियों को हवा दे रहा है। इस प्रतिबंध का असर ईरान की अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य क्षमता पर पड़ना तय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि EU का यह कदम ईरान पर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर दबाव बढ़ाने की एक बड़ी कूटनीतिक चाल है। अब देखना यह होगा कि इस कड़े फैसले पर ईरान की क्या प्रतिक्रिया होती है और मिडिल ईस्ट के शक्ति समीकरणों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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