Desi Parenting
Desi Parenting: इंटरनेट की दुनिया में अक्सर महंगे गैजेट्स और लग्जरी लाइफस्टाइल के वीडियो वायरल होते हैं, लेकिन हाल ही में गूगल (Google) के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर परमिंदर सिंह द्वारा साझा की गई एक पोस्ट ने नेटिजन्स को हंसने और भावुक होने पर मजबूर कर दिया है। टेक जगत के इतने बड़े पद पर रह चुके व्यक्ति के घर में भी एक आम भारतीय परिवार जैसी सादगी देखने को मिली। परमिंदर सिंह ने अपने पिता को सरप्राइज देते हुए नवीनतम ‘एप्पल मैकबुक नियो’ (Apple MacBook Neo) गिफ्ट की। उन्हें उम्मीद थी कि पिता लैपटॉप के फीचर्स और उसकी चमक देखकर खुश होंगे, लेकिन कहानी में एक मजेदार मोड़ तब आया जब अनपैकिंग शुरू हुई।
जैसे ही परमिंदर सिंह ने एप्पल का प्रीमियम सफेद बॉक्स अपने पिता के सामने रखा, पिता की नजरें लैपटॉप की स्क्रीन या उसके स्लीक डिजाइन पर टिकने के बजाय उस मजबूत कार्डबोर्ड बॉक्स पर अटक गईं। अनपैकिंग के दौरान पिता ने बड़े ही अधिकार और ठेठ पंजाबी अंदाज में घोषणा कर दी— ‘एह डब्बा कोई नी फंकेगा’ (इस डिब्बे को कोई नहीं फेंकेगा)। उनके लिए लाखों का लैपटॉप अपनी जगह था, लेकिन एप्पल का वह शानदार और टिकाऊ डिब्बा भविष्य में जरूरी कागजात या सामान रखने के लिए एक अनमोल संपत्ति बन गया था। यह सादगीपूर्ण प्रतिक्रिया अब सोशल मीडिया पर ‘देसी पेरेंट्स’ का सिग्नेचर स्टाइल बन गई है।
परमिंदर सिंह (@parrysingh) द्वारा साझा की गई इस पोस्ट को अब तक 1,43,000 से अधिक बार देखा जा चुका है। कमेंट सेक्शन में यूजर्स ने अपनी पुरानी यादों का पिटारा खोल दिया है। एक यूजर ने लिखा, “यह भारतीय माता-पिता की चरम ऊर्जा है; उनके लिए गैजेट से ज्यादा उसकी पैकिंग की उपयोगिता मायने रखती है।” वहीं एक अन्य यूजर ने मजाक में कहा, “लैपटॉप तो कुछ सालों में पुराना हो जाएगा, लेकिन वह डिब्बा अगले 15 साल तक अलमारी में बैंक पासबुक या बिजली के बिल सहेज कर रखेगा।” कई लोगों ने स्वीकार किया कि उनके घरों में भी आईफोन और लैपटॉप के खाली डिब्बे किसी ‘ट्रॉफी’ की तरह सजाकर रखे गए हैं।
यह छोटी सी घटना आज की पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के बीच के वैचारिक अंतर को बखूबी दर्शाती है। जहां आज की ‘जेन-जी’ और ‘मिलेनियल्स’ ब्रांड इमेज, अनबॉक्सिंग एक्सपीरियंस और दिखावे पर ध्यान देते हैं, वहीं हमारे बुजुर्ग आज भी ‘रीयूज़ और रिसाइकिल’ (Reuse & Recycle) के सिद्धांत को व्यावहारिक रूप से जीते हैं। उनके लिए कोई भी चीज तब तक बेकार नहीं है जब तक उसका दूसरा उपयोग न ढूंढ लिया जाए। एप्पल का वह प्रीमियम बॉक्स, जिसकी कीमत कंपनी की नजर में मार्केटिंग का हिस्सा है, भारतीय पिता की नजर में एक ‘मजबूत संदूक’ है।
परमिंदर सिंह की इस पोस्ट ने साबित कर दिया कि सफलता के किसी भी शिखर पर पहुँचने के बाद भी परिवार और माता-पिता की वही पुरानी आदतें हमें जमीन से जोड़े रखती हैं। यह वीडियो सिर्फ एक गैजेट के बारे में नहीं है, बल्कि उस अटूट भारतीय परंपरा के बारे में है जहाँ संसाधनों की कद्र करना सिखाया जाता है। लाखों लोग इस पोस्ट से इसलिए जुड़ पा रहे हैं क्योंकि लगभग हर भारतीय घर में डिब्बों, पुरानी बोतलों और थैलियों का एक ‘गुप्त भंडार’ होता है। अंततः, पिता के उस एक वाक्य ने तकनीक की चमक-धमक पर भारतीय संस्कारों और सादगी की जीत दर्ज कर दी।
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