Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी का मुद्दा गरमा गया है। राज्य में सत्ताधारी पार्टी भाजपा लगातार कांग्रेस पर अंदरूनी झगड़ों को लेकर तीखा प्रहार कर रही है। कांग्रेस जहां भाजपा को विभिन्न मुद्दों पर घेरने का प्रयास कर रही है, वहीं उसके ही वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी और आपसी विवादों की वजह से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस बीच बीजेपी ने कांग्रेस के त्रिकोणीय गुटबाजी में फंसे होने का आरोप लगाकर सियासी लाभ उठाना शुरू कर दिया है।

बिलासपुर में खुलकर दिखी कांग्रेस की दरार
हाल ही में बिलासपुर में हुए ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ आंदोलन के दौरान कांग्रेस के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के भाषण को बीच में रोक दिया गया। इस घटना ने साफ संकेत दिए कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सार्वजनिक मंच पर नेताओं के बीच तल्खियों और आपसी असहमति ने पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मौके पर बीजेपी के नेताओं ने कांग्रेस की इस स्थिति का जमकर राजनीतिक फायदा उठाया।

बीजेपी के नेताओं के तंज
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस की इस स्थिति पर तीखा तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस लगातार हार के बाद इतनी बौखलाई हुई है कि उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे उलझन में उलजलूल हरकतें कर रहे हैं।”
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कांग्रेस की स्थिति की तुलना बरमुड़ा ट्रायंगल से करते हुए कहा, “जिस जहाज ने बरमुड़ा ट्रायंगल में कदम रखा, वह कभी बाहर नहीं निकल पाया। ठीक उसी तरह छत्तीसगढ़ कांग्रेस भी भूपेश बघेल, दीपक बैज और चरणदास महंत के त्रिकोणीय गुटों में फंसी हुई है।” इस बयान से साफ है कि बीजेपी कांग्रेस के अंदरूनी विवादों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाकर उसे कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का पलटवार
वहीं, कांग्रेस पार्टी कमान इस आरोप को खारिज करती नजर आ रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस में सभी नेता और कार्यकर्ता मिलकर काम करते हैं। बैज ने साफ किया कि पार्टी की जिम्मेदारियां संगठन के माध्यम से तय होती हैं और सभी इसे स्वीकार करते हैं। उनका कहना है कि पार्टी में सामूहिक प्रयास से काम होता है और किसी भी तरह की गुटबाजी को वह गलत समझते हैं।
राजनीतिक हलचल जारी
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दलों के बीच सियासी लड़ाई तेज हो रही है। ऐसे में कांग्रेस के अंदरूनी विवाद भाजपा को राजनीतिक बढ़त दे सकते हैं। भाजपा इन विवादों को खूब हवा दे रही है ताकि वे चुनाव में कांग्रेस की कमजोर स्थिति का फायदा उठा सके।
वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनौती है कि वह अपनी अंदरूनी एकता को बनाकर रखे और विपक्षी हमलों का प्रभावी जवाब दे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को एकजुट होकर विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और भाजपा का सियासी वार इस वक्त मुख्य विषय बने हुए हैं। इस राजनीतिक जंग में कांग्रेस को अपनी एकता बनाए रखना होगा और भाजपा की रणनीति को सफल नहीं होने देना होगा। आगामी समय में दोनों पार्टियों की जंग और तेज होने की संभावना है।
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