मेडिकल काॅलेज अस्पताल में वार्डों में गिरा फाल्स सिलिंग, बारिश में खुली मेंटनेंस की पोल

डीन व अधीक्षक ने सीजएमएससी के ईई के साथ किया मुआयना

अंबिकापुर @thetarget365 पिछले तीन दिनों से शहर में हो रही मूसलाधार बारिश ने मेडिकल काॅलेज अस्पताल की मेंटनेंस की पोल खोल दी है। यहां की खस्ताहालत को दूर करने लंबे समय कवायद चल रही है। बारिश के पानी का सीपेज रोकने के लिए अस्पताल भवन के ऊपर छायादार शेड लगाने के बाद भी अस्पताल भवन के कई हिस्से पानी से तरबतर हो गए हैं। अस्पताल भवन में लगे फाल्स सीलिंग कई जगहों पर गिर रहे हैं। मेडिकल काॅलेज के अधिष्ठाता ने इसकी जानकारी अस्पताल भवन के निर्माण मेंटनेंस का ध्यान रखने वाले सीजीएमएससी के एमडी को भी दी है।

जानकारी अनुसार मूसलाधार बारिश के बीच मेडिकल काॅलेज अस्पताल के मेल सर्जिकल वार्ड के बाहर, आर्थों वार्ड के बाहर कारीडोर के अलावा मातृ एवं शिशु अस्पताल परिसर में स्थित फिमेल सर्जिकल वार्ड के अंदर लगाए गए फाल्स सीलिंग गिरने से आसपास मौजूद लोगों व मरीजों के बीच अफरातफरी की स्थिति बन गई। इसकी जानकारी मिलने पर मेडिकल काॅलेज के डीन डा. रमणेश मूर्ति, अस्पताल अधीक्षक डा. आरसी आर्या ने अस्पताल सीजीएमएससी के ईई उमाशंकर पटेल व अन्य जिम्मेदारों के साथ अस्पताल भवन का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान इन्होंने पाया कई जगह लगे फाल्स सीलिंग पानी से फूलकर गिर गए हैं, कई गिरने के कगार पर हैं। ऐसे हालातों के बीच अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि खतरे की स्थिति न बने इसे देखते हुए पानी से फूल चुके फाल्स सीलिंग को निकलवाया जा रहा है। इसी तरह वार्ड और नर्सों के कक्ष में सीपेज की समस्या बनी हुई है। ऐसे में मरीजों के लिए नर्सों को काफी दिक्कतों के बीच काम करना पड़ रहा है। पानी के सीपेज से दीवारों में भी करेंट प्रवाहित हो रहा है। ऐसे हालातों से मरीजों व स्टाफ को उबारने के लिए सीजीएमएससी के द्वारा लगभग चार माह पहले ही मरम्मत का कार्य कराया गया था, इसके बाद भी ऐसे हालातों का सामने आना समझ से परे है।

मेंटेनेंस के नाम पर होता है सिर्फ खानापूर्ति

बता दें कि अस्पताल भवन के मेंटनेंस का कार्य लोक निर्माण विभाग व सीजीएमएससी के द्वारा कराया जाता है। इनके द्वारा भवन के मेंटनेंस के नाम पर की जाने वाली खानापूर्ति से ऐसे हालात निरंतर सामने आ रहे हैं। पूर्व में अस्पताल की एक महिला कर्मचारी भी खिड़की का स्लैब गिरने से जख्मी हो चुकी है, इसके बाद भी मरीजों और स्टाफ खतरे की स्थिति में काम कर रहे हैं। कई जगहों पर सीपेज के कारण अस्पताल के अंदर फिसलन की स्थिति भी बन रही है।

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