कार्मेल स्कूल की छात्रा खुदकुशी मामले में उच्च न्यायालय ने शिक्षिका की याचिका किया खारिज

अंबिकापुर @thetarget365 शहर के निजी कार्मेल स्कूल में बीते सात फरवरी 2024 को छठवीं कक्षा की छात्रा अर्चिशा सिन्हा ने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सुसाइड नोट में उसने स्कूल की शिक्षिका के द्वारा प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। पुलिस इस मामले में शिकायत के आधार पर आइपीसी की धारा 305 के तहत एफआइआर दर्ज की थी। विवेचना के बाद पुलिस न्यायालय में चार्जशीट पेश की। आरोपी शिक्षिका इस चार्जशीट को निरस्त करने के लिए उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर की थी, जिसे चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है। इस मामले में उच्च न्यायालर्य का निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बच्चों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

क्या था पूरा मामला

शहर के दर्रीपारा निवासी आलोक कुमार सिन्हा पेशे से इंजीनियर हैं। उनकी 12 वर्षीय बेटी अर्चिशा सिन्हा शहर के कार्मेल स्कूल में कक्षा 6वीं की छात्रा थी। घटना की रात करीब 11 बजे छात्रा अपने कमरे में पंखे के सहारे फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सुसाइड नोट में उसने स्कूल की शिक्षिका पर प्रताड़ित करने और दोस्तों के सामने अपमानित करने का आरोप लगाया था। कार्मेल कान्वेंट स्कूल में नियमित शिक्षिका के पद पर पदस्थ सिस्टर मर्सी उर्फ एलिजाबेथ जोस के खिलाफ अंबिकापुर के मणिपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। इसमें छठवीं की छात्रा को प्रताड़ित करने और खुदकुशी के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया गया था। मृत छात्रा कार्मेल स्कूल में केजी-2 से ही पढ़ाई कर रही थी।

न्यायालय ने कहा

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि स्कूल में अनुशासन के नाम पर बच्चों को प्रताड़ित करना सर्वथा अनुचित है। बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता, भले ही वे बच्चे छोटे हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शारीरिक दंड बच्चों की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सरकार को निर्देश दिया है कि बच्चों को शारीरिक व मानसिक दंड से सुरक्षित रखने के लिए विधायी, प्रशासनिक, सामाजिक और शैक्षिक उपाय किए जाएं। न्यायालय ने यह भी कहा है कि हिंसा का कोई भी कार्य जो बच्चे को आघात पहुंचाता है, आतंकित करता है या उसकी क्षमताओं पर विपरीत असर डालता है, वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है।

सुसाइड नोट से हुआ था खुलासा

खुदकुशी करने से पहले छात्रा ने सुसाइड नोट में लिखा, मर्सी सिस्टर ने मेरा आई कार्ड छीना। वह बहुत ज्यादा पनिशमेंट देती है। अब मेरे पास मरने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। मैं सिस्टर से बदला लूंगी, वह बहुत बुरी और डेंजरस है। प्लीज मेरे जितने भी दोस्त हैं उन्हें पनिशमेंट न दें। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने सिस्टर मर्सी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर निचली अदालत में आरोप पत्र दायर कर दिया है।

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