Farmers Income
Farmers Income: देशभर से किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर जो हालिया आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चिंताजनक और चौंकाने वाले हैं। इन आंकड़ों ने ‘अन्नदाता’ की खुशहाली के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखती हैं, वहीं जमीन पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। भारत का किसान आज दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ उसकी मासिक आमदनी देश के सबसे निचले पायदान पर टिकी है, तो दूसरी तरफ उस पर कर्ज का बोझ हिमालय की तरह बढ़ता जा रहा है। यह असंतुलन न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था बल्कि देश के सामाजिक ढांचे के लिए भी खतरे की घंटी है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश में सबसे खराब स्थिति झारखंड के किसानों की है। झारखंड में एक किसान परिवार की औसत मासिक आय महज 4,895 रुपये दर्ज की गई है। इतनी कम आय में एक पूरे परिवार का भरण-पोषण करना और खेती के खर्च उठाना लगभग असंभव सा प्रतीत होता है। झारखंड के बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है, जहाँ औसत मासिक आय 8,061 रुपये है। ये आंकड़े बताते हैं कि देश के बड़े हिस्से में आज भी खेती केवल जीवन निर्वाह का साधन मात्र रह गई है, लाभ का सौदा नहीं।
मध्य प्रदेश, जिसे अक्सर कृषि कर्मण पुरस्कारों से नवाजा जाता है, वहां के आंकड़े भी डराने वाले हैं। मासिक आय के मामले में एमपी देश में 23वें स्थान पर खिसक गया है। यहां के एक किसान की औसत मासिक आय मात्र 8,339 रुपये है। चिंता की बात यह है कि प्रदेश के 21 पड़ोसी राज्यों के किसान एमपी के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। आंकड़ों के मुताबिक, एमपी के किसानों के 92.49 लाख खातों पर 1.69 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कृषि ऋण बकाया है। आय कम और कर्ज ज्यादा होने के कारण किसानों की ऋण चुकाने की क्षमता (Debt Repayment Capacity) लगातार घट रही है।
पिछले पांच सालों के रुझान बताते हैं कि बैंकों द्वारा कृषि ऋण वितरण में तो तेजी आई है, लेकिन किसानों की जेब तक उसका लाभ नहीं पहुँच रहा है। वर्ष 2020-21 में मध्य प्रदेश में किसानों को 80,110 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था, जो 2024-25 तक बढ़कर 1,33,121 करोड़ रुपये पहुँच गया है। यानी महज पांच वर्षों में कर्ज में 66 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। यह पैसा खाद, बीज और मशीनरी में तो लग रहा है, लेकिन फसल के उचित दाम न मिलने और लागत बढ़ने के कारण शुद्ध आय (Net Income) वैसी नहीं बढ़ रही है जैसी उम्मीद थी।
किसानों की आय के मामले में राज्यों के बीच भारी अंतर देखने को मिलता है। जहां झारखंड और एमपी संघर्ष कर रहे हैं, वहीं मेघालय में एक किसान की औसत मासिक आय 29,348 रुपये है, जो एमपी से लगभग तीन गुना ज्यादा है। मध्य प्रदेश के पड़ोसियों पर नजर डालें तो गुजरात (12,631 रुपये), राजस्थान (12,520 रुपये), महाराष्ट्र (11,492 रुपये) और छत्तीसगढ़ (9,677 रुपये) की स्थिति काफी बेहतर है। केवल उत्तर प्रदेश ही ऐसा राज्य है जो इस मामले में एमपी से पीछे है। यह असमानता दर्शाती है कि कृषि नीतियों और फसल चक्र के क्रियान्वयन में राज्यों के बीच बड़ा अंतर है।
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