US Iran Ceasefire
US Iran Ceasefire : जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम के फैसले का तहे दिल से स्वागत किया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक कदम पर खुशी जताते हुए कहा, “मैं अल्लाह का शुक्र अदा करता हूं कि उसने दोनों देशों को एक मेज पर बैठकर मसले सुलझाने की हिम्मत दी।” अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि दुनिया में किसी भी समस्या का समाधान युद्ध नहीं हो सकता। उन्होंने शांति की पहल करने वाले सभी मुल्कों को अपनी और जम्मू-कश्मीर की जनता की ओर से मुबारकबाद दी और कहा कि बातचीत ही एकमात्र रास्ता है जिससे मानवता को विनाश से बचाया जा सकता है।
फारूक अब्दुल्ला ने युद्ध के वैश्विक प्रभावों पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर यह लड़ाई और आगे बढ़ती, तो दुनिया ऐसे संकट में फंस जाती जिसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के देश दुनिया के लिए मुख्य ‘एनर्जी सोर्स’ (ऊर्जा स्रोत) हैं और खुदा ने उन्हें यह नियामत बख्शी है। इस क्षेत्र में अस्थिरता का मतलब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का चरमराना है। उन्होंने दुआ की कि 10 अप्रैल को होने वाली बातचीत सफल रहे और क्षेत्र में स्थायी शांति आए, ताकि दुनिया की दिक्कतें कम हो सकें।
अब्दुल्ला ने उन लाखों भारतीयों और विशेषकर जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई जो रोजगार के लिए खाड़ी और अरब देशों में रहते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे इलाके के बहुत से लोग वहां काम करते हैं और पैसा भेजते हैं जिससे उनके परिवार पलते हैं। इस जंग ने उनकी जिंदगियों को हिलाकर रख दिया है।” उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि वह अमेरिका के साथ अपनी दोस्ती का इस्तेमाल कर इस शांति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाए, क्योंकि इस युद्ध का सीधा असर भारत के आम नागरिक पर भी पड़ रहा है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र की मोदी सरकार की विदेश नीति की कडी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत ने फिलिस्तीन के मुद्दे को दरकिनार कर केवल इजरायल का पक्ष लेकर एक “बुरा कदम” उठाया है। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि दुनिया अब ‘एक-ध्रुवीय’ (Unipolar) नहीं रही; अब रूस और चीन जैसी बड़ी ताकतें भी वैश्विक मंच पर मौजूद हैं। अब्दुल्ला ने भारत को ‘गुटनिरपेक्षता’ की पुरानी नीति की याद दिलाते हुए कहा कि हमें सभी देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखने चाहिए, जैसा कि ‘पंचशील’ समझौते की भावना रही है।
शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान को मंच बनाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने पड़ोसी देश को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि उसे आतंकवाद का रास्ता पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान शांति और विकास की राह पर नहीं चलेगा, तो वह खुद को और इस क्षेत्र को कभी भी संकट से बाहर नहीं निकाल पाएगा। अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली वार्ता के बाद ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहा यह तनाव स्थायी रूप से समाप्त होगा।
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