India Energy Security
Energy Security: मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में जब भी तनाव की स्थिति पैदा होती है, तो वैश्विक बाजारों में हलचल मच जाना स्वाभाविक है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सबसे बड़ा डर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, पेट्रोल-डीजल की किल्लत और बिजली संकट को लेकर होता है। आम उपभोक्ताओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या आने वाले दिनों में उन्हें महंगाई या पावर कट का सामना करना पड़ेगा? इन तमाम आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार की हालिया इंटर-मिनिस्ट्रियल ब्रीफिंग ने बड़ी राहत दी है। दिल्ली के पावर कॉरिडोर से जारी संदेश स्पष्ट है कि देश की ऊर्जा और ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सुरक्षित है और पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
गर्मियों के मौसम में बिजली की पीक डिमांड को पूरा करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। इस मुद्दे पर ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने इससे निपटने के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। हालांकि भारत की 75% बिजली उत्पादन आज भी कोयले (थर्मल) पर आधारित है, लेकिन सरकार ने कोयले का पर्याप्त बफर स्टॉक सुनिश्चित किया है। ग्रिड को मजबूती देने के लिए 3500 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जा रही है। इसके साथ ही, सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों स्तरों पर बिजली की आपूर्ति बाधित न हो।
बिजली संकट की किसी भी संभावना को खत्म करने के लिए सरकार ने एक कड़ा कदम उठाते हुए ‘सेक्शन 11’ लागू करने का निर्णय लिया है। इसका तकनीकी अर्थ यह है कि देश के सभी पावर प्लांट्स को अनिवार्य रूप से अपनी पूरी उत्पादन क्षमता (Full Capacity) पर काम करना होगा। कोई भी प्लांट संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर उत्पादन कम नहीं कर सकेगा। यह कदम विशेष रूप से गर्मियों के उन महीनों के लिए उठाया गया है जब एसी और कूलर के चलते बिजली की खपत अपने चरम पर होती है। इस मास्टरप्लान के लागू होने से ग्रिड फेल्योर या अघोषित बिजली कटौती का जोखिम न्यूनतम हो गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता ने बाजार में व्याप्त उन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें ईंधन की कमी की बात कही जा रही थी। उन्होंने डेटा साझा करते हुए बताया कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश की सभी तेल रिफाइनरियां बिना किसी रुकावट के अपनी 100% क्षमता पर काम कर रही हैं। रसोई गैस के मोर्चे पर भी स्थिति सामान्य है; रोजाना 5 किलो वाले 1 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर बेचे जा रहे हैं। उद्योगों को मिलने वाली गैस सप्लाई में भी कोई कटौती नहीं की गई है ताकि आर्थिक गतिविधियों का पहिया थमता न रहे।
समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर पोर्ट्स के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय कमर्शियल जहाजों और उन पर तैनात नाविकों की लगातार निगरानी की जा रही है। वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय (MEA) गल्फ देशों के घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए हाल ही में पेट्रोलियम मंत्री ने कतर में अहम रणनीतिक बैठकें की हैं। भारत न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि श्रीलंका जैसे पड़ोसियों की भी मदद कर रहा है। हालांकि, लेबनान की स्थिति को लेकर सरकार चिंतित है और वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
ईंधन की संभावित कमी की अफवाहों का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व जमाखोरी या कालाबाजारी करने की कोशिश कर सकते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को सख्त निर्देश दिए हैं। जमीनी स्तर पर लगातार निरीक्षण और छापेमारी की जा रही है ताकि पेट्रोल पंपों या गैस एजेंसियों पर कृत्रिम किल्लत पैदा न की जा सके। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सरकार हर मोर्चे पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुस्तैद है।
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