Fatehgarh Sahib road accident : पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में देर रात एक हृदयविदारक सड़क दुर्घटना सामने आई है, जहां श्रद्धालुओं से भरी एक निजी बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 7 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 21 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, बस में कुल 40 श्रद्धालु सवार थे, जो धार्मिक यात्रा से वापस लौट रहे थे। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है, विशेषकर उन परिवारों में जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खो दिया है।

बैसाखी मेले से वापसी के दौरान तकनीकी खराबी बनी काल
हादसे का शिकार हुए श्रद्धालु आनंदपुर साहिब में आयोजित बैसाखी मेले में नतमस्तक होने के बाद अपने घरों की ओर लौट रहे थे। चश्मदीदों के अनुसार, जब बस गांव हिम्मतपुरा के पास पहुंची, तो अचानक वाहन में कोई तकनीकी खराबी आ गई। बस की रफ्तार तेज होने के कारण चालक उस पर नियंत्रण खो बैठा। अनियंत्रित बस सड़क किनारे लगे बिजली के ऊंचे खंभे से जा टकराई और पलट गई। बस के बिजली के खंभे से टकराने के कारण यात्रियों ने बताया कि पलटने के तुरंत बाद बस के लोहे के ढांचे में बिजली का करंट दौड़ गया, जिससे चीख-पुकार मच गई और बचाव कार्य में भी बाधा आई।
मौके पर मची अफरा-तफरी: घायलों को भेजा गया अस्पताल
हादसे के तुरंत बाद मौके पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें राहत कार्यों के लिए मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे श्रद्धालुओं को बाहर निकाला। 12 घायलों को मोरिंडा के अस्पताल और 9 को फतेहगढ़ साहिब के सिविल अस्पताल ले जाया गया। जिन श्रद्धालुओं की हालत अधिक गंभीर थी, उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद चंडीगढ़ पीजीआई (PGI) रेफर कर दिया गया है। दुर्घटनाग्रस्त बस को क्रेन की मदद से सड़क से हटाकर यातायात को सुचारू किया गया।
स्थानीय लोगों ने दिखाया साहस: एंबुलेंस की देरी पर फूटा गुस्सा
हादसे के समय मौजूद स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने देर रात धमाके की आवाज सुनी और तुरंत मदद के लिए दौड़े। उन्होंने आसपास के और लोगों को भी इकट्ठा किया ताकि बस के भीतर फंसे लोगों को निकाला जा सके। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद सरकारी एंबुलेंस काफी देरी से पहुंची, जिसके कारण घायलों को समय पर उपचार मिलने में कठिनाई हुई। अगर मदद थोड़ी जल्दी पहुंच जाती, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं। ग्रामीणों ने निजी वाहनों के जरिए भी कई लोगों को अस्पताल पहुंचाया।
मृतकों की पहचान: दो सगे भाइयों ने एक साथ गंवाई जान
इस भीषण दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं की पहचान कर ली गई है। मृतकों में गांव मैण माजरी के निवासी जगविंदर सिंह, गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथी इकबाल सिंह, लखबीर सिंह, हरवीर सिंह, परदीप कौर और रणजीत कौर शामिल हैं। इसके अलावा कज्जल माजरा गांव के कुलविंदर सिंह की भी इस हादसे में मौत हो गई। इस त्रासदी का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि लखबीर सिंह और हरवीर सिंह सगे भाई थे, जिनकी मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रशासन ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रशासनिक जांच के आदेश: सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। तकनीकी खराबी के दावों की पुष्टि के लिए विशेषज्ञों की टीम बस की जांच करेगी। इसके साथ ही, रात के समय बिजली के खंभों की सुरक्षा और वाहनों की फिटनेस को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है कि क्या यह महज एक तकनीकी खराबी थी या चालक की कोई लापरवाही।

















