FATF Pakistan : फ्रांस की राजधानी पेरिस में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की चार दिवसीय प्लेनरी बैठक संपन्न हो गई है। हालांकि, बैठक के बाद भी पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों की कथित डिजिटल फंडिंग को लेकर कोई नई कार्रवाई सामने नहीं आई है। खासतौर पर जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के ऑनलाइन चंदा जुटाने के तरीकों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं।

जैश-ए-मोहम्मद की ऑनलाइन फंडिंग पर FATF प्रमुख ने नहीं दी जानकारी
ABP न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, FATF प्रमुख गिल्स थॉम्पसन से पूछा गया कि क्या संगठन को पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ऑनलाइन चंदा जुटाने की जानकारी है? उनसे यह भी सवाल किया गया कि क्या भारत ने FATF की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था।

इस पर थॉम्पसन ने बैठक की गोपनीयता का हवाला देते हुए किसी भी विशेष चर्चा की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि बैठक में पाकिस्तान की डिजिटल आतंकी फंडिंग का मुद्दा औपचारिक रूप से उठा या नहीं।
अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटाया गया था
पाकिस्तान को लेकर FATF प्रमुख ने कहा कि अक्टूबर 2022 में देश को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान के साथ एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के माध्यम से बातचीत और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।
FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल देशों पर मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े जोखिमों को दूर करने के लिए निगरानी रखी जाती है। पाकिस्तान के मामले में अब आगे की प्रक्रिया APG के मूल्यांकन से जुड़ी हुई है।

2029 तक पाकिस्तान का मूल्यांकन पूरा होने का दावा
ABP न्यूज के मुताबिक, उसके द्वारा देखे गए APG के दस्तावेजों में पाकिस्तान के मूल्यांकन की समयसीमा 31 मार्च 2029 बताई गई है। इसके तहत APG को निर्धारित तारीख तक मूल्यांकन पूरा करके अपनी रिपोर्ट जमा करनी है।
इसके बाद वर्ष 2030 की FATF प्लेनरी बैठक में इस रिपोर्ट पर चर्चा होने की बात कही गई है। यानी पाकिस्तान के खिलाफ आगे की कार्रवाई या किसी नए फैसले को लेकर अभी लंबी प्रक्रिया बाकी दिखाई देती है। हालांकि, अंतिम निर्णय FATF के मूल्यांकन और संबंधित तथ्यों पर निर्भर करेगा।
जैश-ए-मोहम्मद के 391 करोड़ रुपये जुटाने का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले वर्ष ABP न्यूज ने जैश-ए-मोहम्मद की ऑनलाइन फंडिंग को लेकर खुलासा किया था। इसके मुताबिक, संगठन ने पाकिस्तान में डिजिटल माध्यमों से कथित तौर पर 391 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया था।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इस रकम और पाकिस्तानी सरकार से मिली कथित मदद के जरिए संगठन ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त हुए अपने मुख्यालय का पुनर्निर्माण कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्माण कार्य अब पूरा हो चुका है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
आतंकी संगठनों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले ने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों की फंडिंग और उनके नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि मूल्यांकन प्रक्रिया लंबी होने के दौरान आतंकी संगठन अपनी गतिविधियां जारी रख सकते हैं।
लेख में मसूद अजहर, तल्हा अल सैफ, अम्मार अल्वी और मुफ्ती रऊफ असगर जैसे नामों का उल्लेख करते हुए आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान भविष्य में आतंकियों और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई का दावा कागजी रिकॉर्ड के आधार पर कर सकता है। हालांकि, ये लेखक की आशंकाएं हैं, FATF का आधिकारिक निष्कर्ष नहीं।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की कथित ऑनलाइन फंडिंग पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कब और किस स्तर पर ठोस कदम उठाएंगी।


