Fed Rate Hike : अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए 16 सितंबर 2026 को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने सर्वसम्मति से दर बढ़ाने का फैसला किया। इस वृद्धि के बाद फेडरल फंड्स रेट का लक्ष्य दायरा 3.75 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गया है। यह जुलाई 2023 के बाद पहली दर वृद्धि है।
महंगाई अभी भी फेड के 2 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर
फेड के ताजा फैसले के पीछे अमेरिका में बनी हुई महंगाई प्रमुख वजहों में शामिल है। अगस्त में उपभोक्ता कीमतों में सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत लक्ष्य से काफी अधिक है। फेड ने अपने बयान में भी कहा कि महंगाई अभी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और मौजूदा कदम का उद्देश्य इसे जल्द से जल्द 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर वापस लाना है।
ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव का असर
महंगाई के दबाव के बीच ऊर्जा कीमतों में तेजी भी फेड के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ईरान से जुड़ी परिस्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ने से ईंधन और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव आगे चलकर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
केविन वार्श के कार्यकाल में पहला बड़ा फैसला
फेड चेयरमैन केविन वार्श के कार्यकाल में यह पहला बड़ा ब्याज दर संबंधी फैसला है। सितंबर की बैठक में FOMC के सभी 12 सदस्यों ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में मतदान किया। इससे पहले जुलाई की बैठक में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखा था।
फेड ने आगे की नीति के संकेत भी दिए
सितंबर की बैठक के बाद जारी अनुमानों से संकेत मिला है कि वर्ष 2026 में एक और दर बढ़ोतरी की संभावना पर अधिकारियों के बीच चर्चा है। हालांकि, फेड चेयरमैन केविन वार्श ने भविष्य के फैसलों को पहले से तय नहीं बताया। उन्होंने कहा कि आगे की मौद्रिक नीति आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की दिशा पर निर्भर करेगी। इसलिए आने वाले महीनों में महंगाई, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में गतिविधियां अभी मजबूत
फेड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि अमेरिकी आर्थिक गतिविधियां ठोस गति से बढ़ रही हैं। घरेलू खर्च लचीला बना हुआ है, उत्पादकता वृद्धि मजबूत है और पूंजी निवेश भी बेहतर स्थिति में है। रोजगार में बढ़ोतरी श्रमबल की वृद्धि के अनुरूप बनी हुई है, जबकि बेरोजगारी दर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। इन परिस्थितियों ने फेड को महंगाई पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की गुंजाइश दी है।
डॉट प्लॉट और नए आर्थिक अनुमान पर नजर
अब निवेशकों और बाजार की नजर फेड के डॉट प्लॉट, महंगाई के अनुमान और आर्थिक विकास से जुड़े नए आंकड़ों पर है। सितंबर के अनुमानों में इस साल की महंगाई का अनुमान पहले की तुलना में थोड़ा ऊपर गया है, जबकि अगले साल महंगाई में कमी की उम्मीद बनी हुई है। ब्याज दरों की दिशा आने वाले महीनों में महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर तय होने की संभावना है।
बाजार के लिए फेड का फैसला क्यों महत्वपूर्ण
अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ता है। दर बढ़ने से कर्ज की लागत बढ़ सकती है और निवेश तथा उपभोक्ता खर्च पर असर पड़ सकता है। साथ ही अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और शेयर बाजारों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। अब बाजार यह आकलन कर रहा है कि फेड महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आगे कितनी सख्त मौद्रिक नीति अपनाता है।
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