Femicide Law Italy:
Femicide Law Italy: इटली की संसद ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए फेमिसाइड (Femicide) यानी महिलाओं की हत्या जो सिर्फ उनके महिला होने की वजह से की जाती है, को अब एक अलग अपराध के रूप में मान्यता दे दी है। सांसदों ने इस संबंध में एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत फेमिसाइड के मामलों में अब आजन्म कारावास (उम्रकैद) की सज़ा का प्रावधान होगा।
यह बिल उस दिन (25 नवंबर) को मंज़ूर किया गया, जिसे दुनिया भर में महिलाओं पर हिंसा समाप्त करने के लिए समर्पित अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इटली में पिछले साल 116 महिलाओं की हत्या हुई थी, जिनमें से 106 मामलों में हत्या की वजह सीधे तौर पर उनका जेंडर था। नए कानून के तहत अब ऐसे हर केस को अलग से दर्ज किया जाएगा और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इटली में फेमिसाइड पर कानून की चर्चा पहले भी होती रही थी, लेकिन 22 साल की जूलिया चेकेट्तिन की बेरहमी से हुई हत्या ने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया और कानून को प्राथमिकता सूची में ला दिया।
2022 में, जूलिया के एक्स-बॉयफ्रेंड फिलिप्पो तुरेता ने उसे चाकुओं से गोदकर मार डाला और फिर उसके शरीर को बैग में भरकर एक झील के पास फेंक दिया था। यह खबर कई दिनों तक इटली की सुर्खियों में बनी रही और इसने नागरिकों को इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया। जूलिया के पिता, जीनो चेकेट्तिन, का मानना है कि भले ही यह कानून जरूरी है, लेकिन असली लड़ाई शिक्षा के माध्यम से ही जीती जाएगी।
जूलिया की हत्या के लगभग दो साल बाद, इटली की संसद में घंटों चली बहस के बाद यह महत्वपूर्ण कानून मंज़ूर हो गया। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार और विपक्ष दोनों ने मिलकर इस बिल को पास करने में सहयोग किया।
कानून पास होने के दौरान कई सांसद लाल रिबन पहनकर आए, जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खिलाफ एक वैश्विक प्रतीक है। अब से इटली में किसी भी ऐसी हत्या को जो महिला के जेंडर की वजह से की गई हो, फेमिसाइड कहा जाएगा और यह सीधे आजन्म कारावास की सज़ा का हकदार होगा। यह कदम हिंसा को उसके मूल कारण यानी महिला-विरोधी मानसिकता के आधार पर पहचानने का एक प्रयास है।
इस ऐतिहासिक कानून के बावजूद, कुछ विशेषज्ञों ने इसकी आलोचनाएँ भी की हैं। उनका मानना है कि कानून का दायरा बहुत व्यापक है और अदालत में यह साबित करना मुश्किल होगा कि हत्या की असली वजह वास्तव में जेंडर ही थी।
इन जानकारों का तर्क है कि इटली को सिर्फ सख्त कानून ही नहीं, बल्कि जेंडर इक्वैलिटी (लैंगिक समानता) और शिक्षा पर भी निवेश करने की जरूरत है। संसद में कानून पास होने के बाद तालियाँ तो गूँज उठीं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुकाबला अभी लंबा है। फिर भी, यह कानून इटली द्वारा हिंसा को उसकी जड़ से समझने की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
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