Sudan Hospital Violence: सूडान के दारफुर क्षेत्र में स्थिति भयावह हो गई है। एल फशर शहर के सऊदी मैटरनिटी हॉस्पिटल में अर्धसैनिक बलों के कब्जे के बीच 460 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) प्रमुख टेड्रोस एदोनाम गेब्रेसस ने साझा की। हिंसा का यह नया दौर इस क्षेत्र में पहले से ही जारी संघर्ष का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय मानवाधिकार समूहों ने निर्दोष नागरिकों, अस्पतालों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हमले की निंदा की है।
सूडान के उत्तरी दारफुर में हाल के महीनों में हिंसा के कारण लगभग 1,850 नागरिकों की मौत हुई है। इनमें से 1,350 मौतें इस साल की शुरुआत से 20 अक्टूबर 2025 तक एल फशर में हुई हैं। इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र में मानवाधिकार संकट पैदा कर दिया है।संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने कहा कि नागरिकों और अस्पतालों पर हमला निंदनीय है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
सूडान में अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) ने कुछ हफ्तों पहले पश्चिमी दारफुर इलाके में नियंत्रण हासिल किया। इसके बाद शहर में हिंसा और बढ़ गई। गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, सूडानी फौज की सहयोगी द ज्वाइंट फोर्सेस ने RSF पर करीब 2,000 निहत्थे लोगों की हत्या का आरोप लगाया। वहीं RSF ने शहर में आर्मी के मुख्य बेस पर नियंत्रण करने का दावा किया।
सूडान के आर्मी चीफ जनरल अब्देल फतेह अल बुरहान ने कहा कि उनकी फौजें एल फशर शहर से हट रही हैं। इस संघर्ष का सिलसिला अप्रैल 2023 से चल रहा है, जिसमें अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 1.4 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं।
एल फशर और दारफुर क्षेत्र में लगातार हिंसा ने स्थानीय नागरिकों के जीवन को असुरक्षित बना दिया है। अस्पताल जैसे संवेदनशील केंद्रों पर हमला यह दर्शाता है कि युद्धग्रस्त क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच खतरे में है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने कहा है कि बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। OCHA ने सभी पक्षों से गृहयुद्ध रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
इस गृह युद्ध ने केवल सूडान तक ही सीमित नहीं रहकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता पैदा कर दी है। 1.4 करोड़ विस्थापित लोग जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राहत एजेंसियां भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता प्रदान करने में जुटी हैं, लेकिन सुरक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि RSF और सूडानी सेना के बीच संघर्ष जारी रहा, तो दारफुर में मानवाधिकार और जनसंख्या संकट और गहरा सकता है। अस्पतालों और स्कूलों पर हमले यह दर्शाते हैं कि सिविलियन जीवन असुरक्षित है, और अंतरराष्ट्रीय मदद की तत्काल आवश्यकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठन इस मामले में अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने और संघर्ष विराम की पहल करने में लगे हुए हैं। वहीं, स्थानीय नागरिकों का जीवन अभी भी खतरे में है और उन्हें सुरक्षा, भोजन और चिकित्सा की तत्काल जरूरत है।
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