FIFA World Cup Controversy : फीफा वर्ल्ड कप के 23वें संस्करण की शुरुआत आगामी 11 जून से होने जा रही है, लेकिन इस महाकुंभ के आधिकारिक आगाज से ठीक पहले एक बहुत बड़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद सामने आ गया है। इस बार फुटबॉल इतिहास में पहली बार तीन देश—अमेरिका (USA), मेक्सिको और कनाडा—मिलकर संयुक्त रूप से इस भव्य वैश्विक टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं। इस बीच, इराक राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के स्टार और मुख्य स्ट्राइकर आयमेन हुसैन जैसे ही टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका की धरती पर पहुंचे, उन्हें एयरपोर्ट पर ही सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हिरासत में ले लिया गया। इस घटना ने विश्व कप के सुरक्षा प्रोटोकॉल और मेजबान देश के व्यवहार पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकागो एयरपोर्ट पर सात घंटे तक चली सघन पूछताछ
आयमेन हुसैन इराक की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के सबसे महत्वपूर्ण और रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने क्वालीफायर मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन कर इराक को वर्ल्ड कप में जगह दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब हुसैन अमेरिका के शिकागो एयरपोर्ट पर उतरे, तो उन्हें आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारियों ने आगे बढ़ने से रोक दिया। उन्हें तुरंत कस्टडी में लेकर एक बंद कमरे में करीब 7 घंटे तक कड़ी पूछताछ की गई। इराक फुटबॉल टीम के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस मानसिक प्रताड़ना और पूछताछ के दौरान अमेरिकी अधिकारियों ने खिलाड़ी के निजी फोन की भी गहराई से जांच की और डेटा खंगाला। हालांकि, लंबी प्रक्रिया के बाद उन्हें अंततः देश में प्रवेश की अनुमति दे दी गई।

टीम फोटोग्राफर तलाल सलाह को अमेरिका में नहीं मिली एंट्री
यह विवाद सिर्फ मुख्य खिलाड़ी आयमेन हुसैन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों का सख्त रवैया टीम के आधिकारिक स्टाफ के प्रति और भी ज्यादा आक्रामक दिखा। इराक नेशनल फुटबॉल टीम के आधिकारिक फोटोग्राफर तलाल सलाह को भी शिकागो एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिया गया। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों ने तलाल सलाह को करीब 10 घंटों तक बंधक बनाकर कड़ी पूछताछ की। खिलाड़ी की ही तरह फोटोग्राफर के भी मोबाइल फोन और तकनीकी उपकरणों की गहनता से जांच की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतनी लंबी पूछताछ के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने तलाल सलाह को वीजा नियमों या अन्य सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अमेरिका में प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें वापस भेज दिया।
इराकी फुटबॉल एसोसिएशन की रहस्यमयी चुप्पी
इस बेहद अपमानजनक और हैरान करने वाले घटनाक्रम के बाद पूरे खेल जगत में सनसनी फैल गई है, लेकिन इस पूरे मामले पर इराकी फुटबॉल एसोसिएशन (IFA) की तरफ से अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान या तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एसोसिएशन की इस रहस्यमयी चुप्पी पर खेल प्रेमियों और इराक के नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर किसी देश के राष्ट्रीय खिलाड़ी और स्टाफ के साथ ऐसा व्यवहार खेल भावना के पूरी तरह विपरीत है और इस मामले को फीफा के समक्ष आधिकारिक रूप से उठाया जाना चाहिए था।
48 टीमों और 12 ग्रुप्स का महामुकाबला
इस बार का फीफा वर्ल्ड कप कई मायनों में ऐतिहासिक और भव्य होने वाला है। टूर्नामेंट में इस बार रिकॉर्ड 48 देश हिस्सा ले रहे हैं, जिन्हें 4-4 टीमों के कुल 12 अलग-अलग ग्रुप्स में विभाजित किया गया है। तीन बड़े देशों की संयुक्त मेजबानी के कारण इस बार यात्रा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन इराक टीम के साथ हुए इस ताजा दुर्व्यवहार ने टूर्नामेंट के माहौल को थोड़ा तनावपूर्ण बना दिया है। अब देखना यह होगा कि इस विवाद का असर मैदान पर इराक की टीम के प्रदर्शन पर पड़ता है या नहीं, और क्या फीफा इस मामले में कोई दखल देता है।











