Food Scam Exposed : सरगुजा जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। खाद्य निरीक्षक शिव कुमार मिश्रा की शिकायत पर जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति, घुटरापारा के पदाधिकारियों के खिलाफ कोतवाली थाना अंबिकापुर में FIR दर्ज की गई है। यह मामला करीब ₹64.94 लाख रुपये के खाद्यान्न घोटाले से जुड़ा हुआ है।

जानकारी अनुसार, 1 सितंबर 2022 से 31 मार्च 2024 तक की अवधि के बीच समिति द्वारा संचालित तीन शासकीय उचित मूल्य दुकानों — क्रमांक 391001071, 391001029 और 391001054 — में चावल, शक्कर और चना की भारी कमी पाई गई। जांच में चावल 1631.29 क्विंटल (मूल्य ₹61,62,267.96), शक्कर 10.43 क्विंटल (₹49,160.62), और चना 48.34 क्विंटल (₹2,92,692.09) का अभाव पाया गया। कुल मिलाकर ₹64,94,120.67 के खाद्यान्न का गबन सामने आया है।

इस मामले में समिति के पदाधिकारियों — अध्यक्ष पवन सिंह (घुटरापारा), उपाध्यक्ष सुनिता पैकरा, सहायक विक्रेता फरहान सिद्धीकी, प्रिंस जायसवाल, सैफ अली और मुकेश यादव को आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
खाद्य विभाग द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर यह पाया गया कि उक्त दुकान संचालकों ने छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2016 की कंडिका 5(1), 11(5), 11(11) एवं 15 का उल्लंघन किया है। जांच प्रतिवेदन कलेक्टर खाद्य शाखा को सौंपे जाने के बाद कोतवाली थाना अंबिकापुर में यह मामला दर्ज किया गया।
थाना प्रभारी ने बताया कि अपराध क्रमांक 0742/2025 धारा 420 भा.दं.सं. एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 3/7 के तहत पंजीबद्ध कर लिया गया है और जांच सहायक उप निरीक्षक द्वारा प्रारंभ कर दी गई है।
यह मामला न केवल खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उचित मूल्य की दुकानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक है। सरकारी राशन प्रणाली आम नागरिकों की जीवनरेखा है। ऐसे घोटाले गरीबों के अधिकारों पर डाका डालने के समान हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस आर्थिक अनियमितता में लिप्त दोषियों के खिलाफ कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।











