ताज़ा खबर

पूर्व मुख्यमंत्री डीडी लपांग का निधन: मेघालय की राजनीति का चमकता सितारा हुआ अस्त

DD Lapang dies: मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. डीडी लपांग का शुक्रवार देर रात शिलांग के बेथनी अस्पताल में निधन हो गया। 93 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस लेने वाले लपांग के निधन से पूरे राज्य और देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

साधारण जीवन से असाधारण सफर

डीडी लपांग का जन्म 1934 में शिलांग में हुआ था। एक गरीब मजदूर के रूप में जीवन की शुरुआत करने वाले लपांग ने रात में पढ़ाई और दिन में मजदूरी करते हुए अपनी शिक्षा पूरी की। उन्होंने ग्रेजुएशन एक इवनिंग कॉलेज से किया और बाद में शिक्षक, टाइपिस्ट और स्कूल निरीक्षक जैसे विभिन्न पदों पर काम किया। 1972 में राजनीति में कदम रखने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

चार बार बने मुख्यमंत्री

लपांग ने 1972 में पहली बार नोंगपोह विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। यह वही वर्ष था जब मेघालय को असम से अलग कर एक नया राज्य बनाया गया था। वे 1992 से 2008 तक चार बार मुख्यमंत्री बने। उनके कार्यकाल में राज्य ने कई महत्वपूर्ण सामाजिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े बदलाव देखे। उन्हें मेघालय का सबसे स्थायी और प्रभावशाली नेता माना जाता है।

राज्य निर्माण और री-भोई जिले में योगदान

डीडी लपांग का नाम री-भोई जिले के निर्माण से भी जुड़ा हुआ है। 2024 में इसी जिले में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया था, जो उनके योगदान का प्रतीक बन चुकी है। वे हमेशा राज्य के पिछड़े इलाकों के विकास के पक्षधर रहे और शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के क्षेत्र में कई पहल की।

नेताओं ने जताया शोक

मेघालय के वर्तमान मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने लपांग के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “डीडी लपांग एक सच्चे जनसेवक और दूरदर्शी नेता थे। उनका जीवन राज्य की सेवा में समर्पित था। री-भोई जिले और राज्य के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।”

एक प्रेरणा बने लपांग

डीडी लपांग का जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहता है। मजदूर से मुख्यमंत्री बनने का उनका सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दिखाता है कि मेहनत, लगन और सेवा-भावना से कुछ भी संभव है।

डीडी लपांग का निधन केवल एक राजनेता का जाना नहीं है, बल्कि यह मेघालय की राजनीतिक चेतना का एक युग समाप्त होना भी है। राज्य और देश उनके योगदान को हमेशा याद रखेंगे।

thetarget365

Recent Posts

RR vs SRH : 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक शतक बेकार, हैदराबाद ने राजस्थान को हराया

RR vs SRH : IPL 2026 के रोमांचक सफर में शनिवार को एक ऐसा मुकाबला…

4 hours ago

West Bengal Election : भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी की सभा के पास भिड़े BJP-TMC कार्यकर्ता, भारी नारेबाजी

West Bengal Election :  पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी पारा एक बार फिर अपने…

4 hours ago

US Iran Talks Cancelled : ट्रंप ने रद्द किया अपने डेलिगेशन का इस्लामाबाद दौरा, ईरान-अमेरिका वार्ता पर लगा ब्रेक

US Iran Talks Cancelled : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों…

4 hours ago

Manipur Protest : मणिपुर में फिर बवाल, हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे लोग, पुलिस से झड़प

Manipur Protest : मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों के बीच एक बार फिर…

4 hours ago

Whale Vomit : ‘तैरता सोना’ मिलते ही चमकी किस्मत? जानिए एम्बरग्रीस की कीमत और कानूनी नियम

Whale Vomit : समुद्र की असीमित गहराइयां अपने भीतर न जाने कितने ही अनसुलझे रहस्य…

5 hours ago

This website uses cookies.