छत्तीसगढ़

Nanakiram Kanwar Protest: अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठेंगे पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर, कोरबा कलेक्टर को हटाने की मांग

Nanakiram Kanwar Protest:  छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व गृहमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ननकीराम कंवर ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री निवास के सामने धरने पर बैठने का ऐलान किया है। उन्होंने इस संबंध में रायपुर कलेक्टर को लिखित सूचना भी भेज दी है।

क्या है पूरा मामला?

ननकीराम कंवर लंबे समय से कोरबा कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कलेक्टर अनियमितताओं और मनमानी में लिप्त हैं। इस संबंध में वह मुख्यमंत्री और कई कैबिनेट मंत्रियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कंवर ने कहा कि उन्हें मजबूर होकर धरने का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

“अधिकारियों के कंट्रोल में है सरकार”

पूर्व मंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार कुछ आईएएस अधिकारियों के नियंत्रण में चल रही है। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री को सच तक नहीं बताया जाता और उन्हें गुमराह किया जाता है, जिससे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।

पुरानी शिकायतों का हवाला

ननकीराम कंवर ने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल में उन्होंने कई बड़े घोटालों — जैसे पीएससी परीक्षा घोटाला, शराब घोटाला, सीजीएमएससी दवाई खरीदी, कोयला, डीएमएफ, और एनएचएआई मुआवजा घोटाला — की शिकायतें केंद्र सरकार से की थीं, जिनमें जांच के बाद कई आईएएस अफसरों और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी।

उन्होंने कहा कि कोरबा में ओडीएफ घोटाले की जानकारी भी उन्होंने कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप के समक्ष एक सार्वजनिक मंच से दी थी। हालांकि उस समय तत्कालीन कलेक्टर पी. दयानंद ने आरोपों को खारिज किया, लेकिन बाद में कई मामलों में एसडीएम कार्यालय में शिकायतें दर्ज हुईं।

भाजपा सरकार पर भी सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंवर ने अपनी ही पार्टी की भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक वरिष्ठ नेता की शिकायतों को तवज्जो नहीं मिल रही, तो आम जनप्रतिनिधियों की बात कैसे सुनी जाएगी? उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।

ननकीराम कंवर का यह कदम भाजपा के लिए राजनीतिक असहजता पैदा कर सकता है। एक ओर सरकार पर प्रशासनिक नियंत्रण के आरोप, दूसरी ओर अपने ही नेता द्वारा विरोध प्रदर्शन — यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर भी निराशा और असंतोष पनप रहा है। देखना होगा कि 4 अक्टूबर को होने वाले इस धरने के बाद सरकार की प्रतिक्रिया क्या होती है।

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