Frederiksen Leaves UK : ब्रिटेन के नौवें सबसे अमीर व्यक्ति और शिपिंग जगत के दिग्गज जॉन फ्रेडरिक्सन ने ब्रिटेन की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों से नाराज होकर देश छोड़ दिया है। उन्होंने लंदन स्थित अपनी भव्य हवेली को लगभग 33.7 करोड़ पाउंड (भारतीय मुद्रा में लगभग 3,000 करोड़ रुपये) में बेच दिया और अब दुबई को अपना नया घर बना लिया है। उन्होंने तल्ख शब्दों में कहा, “ब्रिटेन अब नर्क बन गया है। पूरा पश्चिमी जगत पतन के कगार पर है।”
फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रेडरिक्सन की हवेली किसी शाही महल से कम नहीं थी। करीब 30,000 वर्ग फुट में फैली इस आलीशान संपत्ति में दस बेडरूम, एक निजी बॉलरूम, विशाल गार्डन, और दुर्लभ सजावटी वस्तुएं शामिल थीं। हवेली का गार्डन लगभग दो एकड़ में फैला हुआ था, जिसमें दुर्लभ फूलों और पेड़ों की देखरेख के लिए अलग स्टाफ भी तैनात था।
जॉन फ्रेडरिक्सन पहले भी ब्रिटेन की कर नीति और आर्थिक संरचना की आलोचना कर चुके हैं। इस बार उन्होंने अपनी कंपनी ‘सीटैंकर्स’ का ब्रिटेन स्थित मुख्यालय भी बंद कर दिया है। उनका मानना है कि वर्तमान कर ढांचे में व्यापार करना कठिन हो गया है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो विदेशी आय पर निर्भर हैं।
जॉन फ्रेडरिक्सन अकेले नहीं हैं, जो ब्रिटेन छोड़कर दूसरे देशों का रुख कर रहे हैं। 2024 में ही 10,800 करोड़पतियों ने ब्रिटेन को अलविदा कहा था, जो पिछले साल के मुकाबले 157 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, 2025 के शुरुआती महीनों में ही 16,500 करोड़पति ब्रिटेन से बाहर चले गए हैं। इसके चलते देश को 66 अरब पाउंड से ज्यादा का निवेश घाटा झेलना पड़ा है।
ब्रिटेन के इस कर और राजनीतिक संकट का सबसे बड़ा असर लंदन पर पड़ा है। 2014 से लेकर अब तक लगभग 30,000 करोड़पति लंदन छोड़ चुके हैं। यह शहर कभी निवेशकों और कारोबारियों की पहली पसंद हुआ करता था, लेकिन मौजूदा माहौल ने इसकी छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है।
सत्तारूढ़ लेबर पार्टी की हालिया कर नीतियों ने अमीरों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। सरकार ने ‘अनिवासी’ (Non-Domiciled) श्रेणी के निवासियों पर नए कर नियम लागू कर दिए हैं, जिससे वे अब विदेशी आय पर टैक्स बचा नहीं सकते। हालाँकि सरकार ने बाद में कर छूट की पेशकश भी की और ‘ब्रिटानिया कार्ड’ जैसी योजनाएं जून के अंत में लॉन्च कीं, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
विशेषज्ञों का मानना है कि जॉन फ्रेडरिक्सन जैसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी का ब्रिटेन से जाना सिर्फ एक उदाहरण नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। यह इंगित करता है कि देश में आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता ने संपन्न वर्ग का भरोसा खो दिया है। निवेशकों और अमीर नागरिकों में भय है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो यह सिलसिला और तेज़ हो सकता है।
जॉन फ्रेडरिक्सन का ब्रिटेन से पलायन और दुबई में बसना उस गहरी असंतोष की कहानी कहता है जो ब्रिटेन के अमीर वर्ग में सरकार की नीतियों को लेकर बढ़ रही है। यह न सिर्फ ब्रिटेन के लिए एक आर्थिक चेतावनी है, बल्कि एक वैश्विक संकेत भी कि धन, अब सिर्फ सीमाओं में नहीं बंधा — वह भरोसे के पीछे चलता है।
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