G RAM G Act President Approval
G RAM G Act President Approval: भारत के ग्रामीण विकास और रोजगार गारंटी क्षेत्र में एक युगांतरकारी परिवर्तन हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बहुप्रतीक्षित ‘जी राम जी बिल’ (Ji Ram Ji Bill) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब यह बिल एक सशक्त कानून का रूप ले चुका है। इस नए कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि केंद्र सरकार की सबसे लोकप्रिय रोजगार योजना ‘मनरेगा’ (MGNREGA) का नाम अब पूरी तरह से बदलकर ‘जी राम जी’ कर दिया गया है। यह बदलाव केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए योजना के ढांचे में कई क्रांतिकारी सुधार भी किए गए हैं।
पुराने मनरेगा कानून और नए ‘जी राम जी’ कानून के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर कार्य दिवसों की संख्या को लेकर है। पूर्ववर्ती मनरेगा योजना के अंतर्गत पंजीकृत कामगारों को एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती थी। हालांकि, बढ़ती महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग को देखते हुए सरकार ने ‘जी राम जी’ कानून के तहत इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। काम के गारंटीशुदा दिनों में 25% की यह वृद्धि ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय सुधार करेगी और पलायन जैसी समस्याओं को रोकने में सहायक सिद्ध होगी।
इस नए कानून के माध्यम से सरकार ने न केवल रोजगार के दिनों को बढ़ाया है, बल्कि इसके क्रियान्वयन में भी कई सुधार किए हैं। ‘जी राम जी’ योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ संपत्तियों का निर्माण करना और अकुशल श्रमिकों को सम्मानजनक आजीविका प्रदान करना है। इस कानून में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और भुगतान प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून ग्रामीण भारत के लिए ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगा, जिससे सामाजिक और आर्थिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दी गई यह मंजूरी इस बात का संकेत है कि सरकार ग्रामीण श्रमशक्ति को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘जी राम जी’ कानून के लागू होने से राज्यों को अब अपने बजट और नियोजन में बदलाव करने होंगे ताकि 125 दिनों के कार्य आवंटन को सुचारू रूप से लागू किया जा सके। यह कानून विशेष रूप से उन राज्यों के लिए वरदान साबित होगा जहाँ कृषि के अलावा रोजगार के अन्य साधन सीमित हैं। राष्ट्रपति की मुहर के साथ ही अब देश भर के करोड़ों जॉब कार्ड धारकों के लिए सुनहरे भविष्य की राह खुल गई है।
ग्रामीण भारत में अकुशल श्रमिकों के लिए मनरेगा जीवन रेखा रही है, और अब ‘जी राम जी’ के रूप में इसका नया अवतार अधिक आशाजनक है। अतिरिक्त 25 दिनों का काम मिलने से श्रमिकों के हाथ में अधिक नकदी (Disposable Income) आएगी, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण बाजारों पर पड़ेगा। इसके अलावा, योजना के तहत होने वाले कार्यों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण और बुनियादी ढांचे के विकास पर अधिक जोर दिया जाएगा। ‘जी राम जी’ कानून यह सुनिश्चित करेगा कि गांव का पैसा गांव के विकास में लगे और श्रमिकों को उनके घर के पास ही पर्याप्त काम मिले।
‘जी राम जी’ बिल का कानून बनना भारत सरकार के ‘अंत्योदय’ संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम है। नाम परिवर्तन के साथ-साथ कार्य दिवसों में की गई यह वृद्धि न केवल श्रमिकों का मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की क्रय शक्ति को भी पुनर्जीवित करेगी। अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन इस नए कानून के प्रावधानों को धरातल पर उतारने के लिए तत्परता दिखाएं, ताकि ‘जी राम जी’ योजना का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।
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