Gang war Ecuador Jail: दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर की जेलों में एक बार फिर हिंसा की लपटें उठी हैं। एल ओरो प्रांत की राजधानी माचाला स्थित सामाजिक पुनर्वास जेल में सोमवार तड़के भयानक दंगा भड़क उठा। गैंगवार और अंधाधुंध फायरिंग के बीच 13 कैदियों और एक जेल सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य घायल हो गए। इस ताजा हिंसा ने देश की जेल व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कैदी जब गहरी नींद में थे, तभी अचानक गोलियों की आवाज और जोरदार धमाके गूंजे। मची अफरा-तफरी में सुरक्षाकर्मियों ने हालात को संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। कैदी इधर-उधर भागने लगे, कुछ घायल हुए, कुछ की मौके पर ही मौत हो गई।
जेल अधिकारियों के मुताबिक, मारे गए कैदियों में अधिकांश कुख्यात ‘लॉस चोनेरोस’ (Los Choneros) गैंग के सदस्य थे। यह गैंग इक्वाडोर की सबसे खतरनाक और हिंसक आपराधिक गिरोहों में से एक माना जाता है, जो प्रतिद्वंदी गैंग ‘लॉस लोबोस’ (Los Lobos) के साथ लंबे समय से टकराव में है।
झड़प के दौरान दंगाई कैदियों ने सुरक्षाकर्मियों से हथियार भी छीन लिए और जेल के कई हिस्सों में कब्जा कर लिया। हालात का फायदा उठाकर कई कैदी जेल से फरार होने में कामयाब हो गए। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 कैदियों को दोबारा पकड़ लिया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
जेल के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया गया है और करीब 200 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी अब भी तैनात हैं। इक्वाडोर पुलिस ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें सुरक्षाकर्मी जेल में घुसकर दंगाइयों को काबू में करते दिख रहे हैं।
इक्वाडोर की जेलों में हिंसा कोई नई बात नहीं है। देशभर की जेलें ओवरक्राउडिंग, सुरक्षा की कमी और गैंग वॉर की वजह से लगातार हिंसा की आग में जल रही हैं। माचाला की यह जेल भी क्षमता से कहीं ज्यादा कैदियों से भरी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में Los Choneros, Los Lobos, Tiguerones और Lagartos जैसे गैंगों के बीच संघर्ष में सैकड़ों कैदी मारे जा चुके हैं।
जेल के आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। कई निवासियों ने बताया कि सुबह-सुबह गोलियों की आवाज और पुलिस सायरन से लोग डर गए। प्रशासन ने इलाके को सील कर दिया है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
इक्वाडोर में जेल हिंसा की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश की जेलें अब अपराधियों के लिए युद्धभूमि बन चुकी हैं। ऐसे में सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह जेलों में व्यवस्था सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए।
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