Gaza Tunnels
Gaza Tunnels: हमास और इजरायल के बीच भले ही अस्थाई सीजफायर लागू हो गया है, लेकिन गाजा में जंग के परिणामों और इसके पूरी तरह से समाप्त होने में अभी भी बरसों लग सकते हैं। गाजा पट्टी को पूरी तरह से तबाह कर देने वाली इस लड़ाई में हमास के कई शीर्ष और खूंखार कमांडरों को मौत के घाट उतारा गया है। युद्ध समाप्ति के बाद भी एक अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है: गाजा की सुरंगों के विशाल नेटवर्क के भीतर अभी भी सैकड़ों हमास लड़ाके फंसे हुए हैं। इन दम घोंट देने वाली सुरंगों के अंदर न कोई बाहरी जानकारी पहुंचती है और न ही अंदर की कोई खबर बाहर आती है। माना जा रहा है कि इन लड़ाकों को शांति समझौते के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और वे अपनी सुरक्षा के डर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं।
इजरायल तक घुसपैठ करने और हमले करने के उद्देश्य से गाजा में हमास द्वारा बनाई गई इन अंधेरी, भूमिगत गुफाओं में युद्ध के दौरान अनुमानित 200 हमास लड़ाके छिप गए थे। इन सुरंगों में न तो ठीक से ऑक्सीजन पहुंचती है और न ही सूरज की एक किरण, फिर भी लड़ाकों को यही जगह सबसे सुरक्षित ठिकाना लग रही थी, जिसे वे ‘गाजा मेट्रो’ कहते हैं। हालांकि, इजरायली सेना ने अब एक चौंकाने वाला दावा किया है कि इन 200 फंसे हुए लड़ाकों में से 40 को मौत के घाट उतार दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब ये लड़ाके आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार नहीं थे।
इजरायली सेना (IDF) ने गाजा के दक्षिणी शहर राफा के नीचे बनी दमघोंटू सुरंगों में छुपे 40 हमास लड़ाकों की मौत की पुष्टि की है। ये लड़ाके कई महीनों से इन अंधेरी सुरंगों में छिपे हुए थे। यह खबर पहले से ही टूट चुके हमास संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि मारे गए लोगों में कम से कम तीन लोकल कमांडर्स भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो राफा क्षेत्र में हमास की गतिविधियों का नेतृत्व कर रहे थे।
मारे गए 40 हमास के लोगों में से एक की पहचान अब्दुल्लाह हमाद के रूप में हुई है, जो हमास के निर्वासित वरिष्ठ नेता गाजी हमाद का बेटा था। गाजी हमाद हमास के राजनीतिक कार्यालय में एक बड़ा और जाना-पहचाना चेहरा हैं, जो अक्सर मीडिया में बयान देते रहते हैं। उनका बेटा अब्दुल्लाह हमाद राफा की एक सुरंग से भागने की कोशिश करते हुए मारा गया। इस हाई-प्रोफाइल मौत ने हमास के नेतृत्व के भीतर भी तनाव और डर बढ़ा दिया है।
सुरंगों में छुपे हमास लड़ाकों को लेकर इजरायली सेना के चीफ ने एक कड़ा और अंतिम अल्टीमेटम दिया था: “या तो सरेंडर करो, या खात्मा (surrender or face elimination)।” हमास लड़ाकों ने आत्मसमर्पण करने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
इसके अलावा, चौंकाने वाली बात यह है कि वाशिंगटन और अन्य मध्यस्थों ने फंसे हुए लड़ाकों के लिए एक गुप्त समझौता कराने की भी कोशिश की थी। इस समझौते के लिए शर्त यह थी कि हमास के लड़ाके अपने हथियार डाल दें, जिसके बदले में उन्हें गाजा के दूसरे इलाकों में सुरक्षित रास्ता (Safe Passage) दे दिया जाएगा। हालांकि, यह गुप्त कूटनीतिक प्रयास भी सफल नहीं हो पाया, जिससे इन लड़ाकों की मौत हुई। यह घटना दिखाती है कि युद्धविराम के बावजूद गाजा के भूमिगत नेटवर्क में लड़ाई अभी भी खत्म नहीं हुई है।
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