Germany Gen Z Protest : जर्मनी में युवा पीढ़ी यानी Gen Z ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन किया। ‘Gen Z regelt’ यानी ‘Gen Z टेक्स चार्ज’ पहल के तहत आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में देश के 30 से अधिक शहरों के युवाओं ने हिस्सा लिया। आयोजकों को इस आंदोलन में पूरे देश से 1.60 लाख से ज्यादा लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी। कई प्रमुख शहरों में युवाओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। इस प्रदर्शन के जरिए नई पीढ़ी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, पर्यावरण और सैन्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।

कोलोन में राइन नदी के किनारे जुटे हजारों प्रदर्शनकारी
इस देशव्यापी आंदोलन का असर जर्मनी के प्रमुख शहर कोलोन में भी देखने को मिला। यहां राइन नदी के किनारे बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। आयोजकों के अनुमान के मुताबिक, अकेले कोलोन में करीब 15 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना जताई गई थी। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से नीतियों में बदलाव करने की अपील की। युवाओं का कहना है कि उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार जैसे क्षेत्रों में अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए।

शिक्षा बजट से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक उठीं मांगें
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा के लिए सरकारी बजट बढ़ाना शामिल है। युवाओं का कहना है कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और नशा मुक्ति केंद्रों के लिए अधिक फंड उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ और किफायती होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर मदद मिल सके।
महंगाई और जलवायु परिवर्तन को लेकर भी नाराजगी
जर्मनी में बढ़ती महंगाई भी युवाओं के विरोध प्रदर्शन का एक बड़ा मुद्दा रही। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग की, जिनसे आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। इसके साथ ही जलवायु सुरक्षा को मजबूत बनाने की मांग भी उठाई गई। युवाओं का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके मुताबिक, जलवायु संकट का असर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर पड़ेगा, इसलिए इस दिशा में अभी से प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
अनिवार्य सैन्य सेवा दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध
प्रदर्शन में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक जर्मनी में अनिवार्य सैन्य सेवा यानी Compulsory Military Service को दोबारा शुरू किए जाने की संभावना का विरोध रहा। युवाओं ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि सैन्य सेवा को अनिवार्य बनाने का फैसला युवाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकता है। इसी मुद्दे को लेकर युवाओं ने सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

तनाव बढ़ने पर पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल
प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने शुरुआत में प्रस्तावित मार्च को रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को एक निर्धारित स्थान पर स्थायी रैली आयोजित करने की अनुमति दी गई। हालांकि, बाद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कुछ लोगों ने पटाखे फोड़े, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित रैली क्षेत्र से बाहर निकलने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
युवाओं के आंदोलन से जर्मनी की राजनीति में बढ़ी चर्चा
जर्मनी में Gen Z का यह प्रदर्शन केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं और चिंताओं को सामने लाने वाला आंदोलन बनकर उभरा है। शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, महंगाई, जलवायु परिवर्तन और अनिवार्य सैन्य सेवा जैसे मुद्दों पर युवाओं की नाराजगी ने सरकार के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि इस देशव्यापी प्रदर्शन के बाद जर्मनी की सरकार युवाओं की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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