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Ghana President Artists : घाना के राष्ट्रपति बीदरी कला की खुशी छलकी, अंतरराष्ट्रीय मंच पर कला को मिली नई पहचान

Ghana President Artists :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा को बीदरी कला से बना फूलदान उपहार में देने के बाद कर्नाटक की पारंपरिक बीदरी कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। इस अनोखे क्षण से उत्साहित बीदर के कलाकारों ने रविवार को कहा – “PM मोदी हमारे ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं।” उनका कहना है कि पीएम मोदी ने इस कला को वैश्विक मंच तक पहुंचाकर कलाकारों के आत्मविश्वास को नया आयाम दिया है।

500 साल पुरानी कला

बीदर की यह विशेष कला करीब 500 साल पुरानी है, जिसकी उत्पत्ति बहमनी सुल्तानों के शासनकाल में हुई थी। फारसी कला से प्रेरित यह धातु की नक्काशी वाला शिल्प पीढ़ियों से बीदर के कलाकारों द्वारा जीवित रखा गया है। जब प्रधानमंत्री ने इसी बीदरी वेयर को एक विशेष राजनयिक उपहार के रूप में चुना, तो इससे इस पारंपरिक शिल्प को नई अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई।

बीदर के कलाकार भावुक

बीदर के एक वरिष्ठ कलाकार ने कहा, “हमें इस बात पर गर्व है कि हमारे हाथों से बनी एक कलाकृति दुनिया के एक राष्ट्रपति को भेंट की गई।” उन्होंने बताया कि इस प्रकार की पहचान आम तौर पर कारीगरों को नहीं मिलती, लेकिन अब यह जानकर गर्व और भावुकता दोनों का अनुभव हो रहा है कि हमारी कला को वैश्विक मंच पर सराहा गया है।

बीदरी को चुनना गर्व की बात

एक अन्य कलाकार ने कहा, “हमारे देश में कई पारंपरिक कलाएं हैं, लेकिन जब प्रधानमंत्री ने बीदरी को विदेश में उपहार के रूप में चुना, तो यह हमारे लिए गर्व का विषय बन गया।” उनके अनुसार, यह चुनाव देश की कलात्मक विविधता को सम्मानित करता है और यह दर्शाता है कि सरकार अब पारंपरिक हस्तशिल्पों को राजनयिक सांस्कृतिक प्रतिनिधि के तौर पर सामने ला रही है।

हस्तशिल्प से कूटनीति की दिशा में बड़ा कदम

प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपनी विदेश यात्राओं में सांस्कृतिक उपहारों के जरिए भारत की पहचान को मजबूत करते हैं। बीदरी वेयर जैसे विशिष्ट और ऐतिहासिक शिल्प को चुनकर उन्होंने भारत और घाना के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी गहरा किया है। यह सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन गया है।

बीदरी कलाकारों के लिए यह पल किसी सम्मान और गौरव से कम नहीं है। पीएम मोदी के उपहारों के जरिए भारत की कला, संस्कृति और कारीगरों को वैश्विक पहचान मिलने लगी है। बीदरी कला जैसे शिल्प अब केवल संग्रहालयों तक सीमित नहीं, बल्कि राजनयिक पहचान और सांस्कृतिक दूत बनते जा रहे हैं। बीदर के कारीगरों की उम्मीद अब है कि यह रुचि केवल प्रतीकात्मक न रहे, बल्कि इससे आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण भी हो।

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