अंतरराष्ट्रीय

Ghana US Health Deal : डेटा सुरक्षा पर घाना का सख्त रुख, अमेरिका के साथ करोड़ों डॉलर का समझौता रद्द

Ghana US Health Deal :  पश्चिम अफ्रीकी देश घाना ने राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की गोपनीयता को सर्वोपरि रखते हुए अमेरिका के साथ एक बड़े स्वास्थ्य समझौते को ठुकरा दिया है। घाना सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने नागरिकों के संवेदनशील स्वास्थ्य डेटा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। इस निर्णय ने वैश्विक स्तर पर डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) की बहस को एक नई दिशा दे दी है, जहाँ विकासशील देश अब अंतरराष्ट्रीय सहायता के बदले अपनी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने में सावधानी बरत रहे हैं।

डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां

घाना के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन के वरिष्ठ अधिकारी आर्नोल्ड कर्वापुओ ने इस समझौते को खारिज करने के पीछे के तकनीकी कारणों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित समझौते में डेटा सुरक्षा को लेकर कई बुनियादी और बड़ी खामियां थीं। समझौते की शर्तों के अनुसार, अमेरिकी संस्थानों को घाना के नागरिकों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सीधी पहुंच मिल रही थी, जिसके लिए कोई पर्याप्त सुरक्षा ढांचा तैयार नहीं किया गया था। अधिकारी के अनुसार, अमेरिका द्वारा मांगा गया डेटा एक्सेस आवश्यकता से कहीं अधिक व्यापक और असुरक्षित था।

डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का प्रभाव

यह समझौता पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत तैयार किया गया था। वाशिंगटन ने इस नीति के माध्यम से घाना सहित 30 से अधिक अफ्रीकी देशों के साथ इसी तरह के स्वास्थ्य करार किए हैं। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य अफ्रीकी देशों की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने के नाम पर करोड़ों डॉलर की सहायता प्रदान करना था, लेकिन इसके बदले में डेटा एक्सेस की कड़ी शर्तें जोड़ी गई थीं। नई व्यवस्था ने पुरानी सुरक्षित प्रणाली (USAID) को पूरी तरह बदल दिया है, जो अब विवादों के घेरे में है।

जिंबॉब्वे और जाम्बिया ने भी जताई थी असहमति

अमेरिका के इस प्रस्तावित स्वास्थ्य समझौते का विरोध करने वाला घाना अकेला देश नहीं है। इससे पहले फरवरी 2026 में जिंबॉब्वे ने भी डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। वहीं जाम्बिया ने भी समझौते के कड़े प्रावधानों और डेटा एक्सेस की शर्तों पर गंभीर सवाल उठाए थे। अफ्रीकी देशों का मानना है कि सहायता के नाम पर संवेदनशील डेटा का अनियंत्रित उपयोग उनके नागरिकों की पहचान को खतरे में डाल सकता है।

करोड़ों डॉलर की फंडिंग और डेटा एक्सेस का खतरा

इस समझौते के तहत घाना को अगले 5 वर्षों में लगभग 109 मिलियन डॉलर (करीब 300 मिलियन डॉलर के कुल पैकेज का हिस्सा) मिलने वाले थे। इतनी बड़ी धनराशि के बावजूद घाना ने सुरक्षा जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया। समझौते में न केवल स्वास्थ्य डेटा, बल्कि मेटा डेटा, डैशबोर्ड और डेटा डिक्शनरी तक अमेरिकी पहुंच का प्रावधान था। इसके तहत 10 प्रमुख अमेरिकी संस्थानों को बिना किसी पूर्व अनुमति के घाना के डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रवेश मिल जाता, जिससे घाना का अपने ही डेटा पर नियंत्रण समाप्त हो जाता।

भविष्य की साझेदारी और अमेरिकी विदेश विभाग की प्रतिक्रिया

घाना ने अमेरिका को अपने कड़े फैसले से अवगत करा दिया है और मांग की है कि समझौते की शर्तों को न्यायसंगत और सुरक्षित बनाया जाए। दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे द्विपक्षीय वार्ताओं के विवरण सार्वजनिक नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि अमेरिका भविष्य में घाना के साथ स्वास्थ्य साझेदारी को मजबूत करने के लिए अन्य विकल्पों पर काम करता रहेगा। फिलहाल, घाना का यह कदम अन्य विकासशील देशों के लिए एक मिसाल बन गया है।

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