Breaking

Gig Workers Strike : पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से संकट में गिग वर्कर्स, देशव्यापी हड़ताल का बड़ा ऐलान

Gig Workers Strike : देशभर में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों ने आम जनता के साथ-साथ ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स की कमर तोड़ दी है। ईंधन के लगातार बढ़ते दामों के विरोध में अब गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने एक बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। यूनियन की ओर से आधिकारिक घोषणा की गई है कि इस संकट के विरोध में आगामी शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक सभी गिग वर्कर्स अपने मोबाइल ऐप्स बंद रखेंगे। इस पांच घंटे के राष्ट्रव्यापी ‘ऐप-डाउन’ विरोध प्रदर्शन के जरिए वर्कर्स अपनी आर्थिक समस्याओं की ओर सरकार और कंपनियों का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

महंगाई की मार से डिलीवरी बॉय और ड्राइवरों की बचत हुई शून्य

यूनियन का साफ तौर पर कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई का सबसे सीधा और घातक असर डिलीवरी करने वाले युवाओं और कैब ड्राइवरों पर पड़ रहा है। आज के समय में Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए काम करने वाले लाखों प्लेटफॉर्म वर्कर्स पूरी तरह से अपनी बाइक, स्कूटर या कारों पर निर्भर हैं। ईंधन महंगा होने की वजह से उनका प्रतिदिन का परिचालन खर्च काफी बढ़ गया है, जिससे उनकी रोज की शुद्ध बचत लगातार घटती जा रही है। स्थिति यह हो गई है कि दिनभर कड़ी धूप में काम करने के बाद भी इन वर्कर्स के हाथ में परिवार चलाने लायक पैसे नहीं बच पा रहे हैं।

न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर सर्विस रेट तय करने की मांग

अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए यूनियन ने अब कंपनियों के सामने एक प्रमुख मांग रखी है। गिग एवं प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन का कहना है कि सभी ऐप आधारित कंपनियों को गिग वर्कर्स के लिए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का न्यूनतम सर्विस रेट तय करना चाहिए। यूनियन के प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि जब भी बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो वर्कर्स का जेब खर्च तुरंत बढ़ जाता है। इसके विपरीत, कंपनियां अपने डिलीवरी चार्ज या प्रति किलोमीटर भुगतान में कोई बढ़ोतरी नहीं करती हैं। इस विसंगति के कारण सारा आर्थिक बोझ सीधे तौर पर इन गरीब वर्कर्स के कंधों पर आ जाता है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

भीषण गर्मी और आर्थिक दबाव में काम करने को मजबूर कर्मचारी

GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि देश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच डिलीवरी वर्कर्स पहले से ही बेहद कठिन परिस्थितियों में और भारी मानसिक दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे प्रतिकूल मौसम में लंबे समय तक फील्ड में रहने के बाद भी उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है, और अब महंगे ईंधन ने उनकी परेशानियों को दोगुना कर दिया है। उन्होंने कंपनियों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रबंधन ने जल्द ही भुगतान बढ़ाने पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो आने वाले समय में इस आंदोलन को और अधिक उग्र तथा व्यापक किया जाएगा।

देश के 1 करोड़ 20 लाख वर्कर्स के भविष्य का सवाल

यूनियन के नेशनल कोऑर्डिनेटर निर्मल गोराना ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में भारत में करीब 1 करोड़ 20 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स कार्यरत हैं। इस विशाल संख्या में फूड डिलीवरी, ग्रॉसरी डिलीवरी, कूरियर-लॉजिस्टिक्स और कैब सेवाओं से जुड़े हुए लोग शामिल हैं, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सीधा नुकसान इन वर्कर्स को उठाना पड़ता है, क्योंकि कंपनियों की तरफ से उन्हें कोई अतिरिक्त ईंधन भत्ता नहीं मिलता। उन्हें अपनी सीमित कमाई में से ही पेट्रोल का खर्च, गाड़ी की समय-समय पर सर्विसिंग और अन्य रखरखाव के खर्च उठाने पड़ते हैं, जिससे उनका मुनाफा पूरी तरह खत्म हो चुका है।

नीतिगत सुधारों के लिए यूनियन ने सरकार से लगाई गुहार

इस गंभीर संकट से उबरने के लिए गिग वर्कर्स यूनियन ने केवल कंपनियों पर ही भरोसा नहीं जताया है, बल्कि सीधे सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है। यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि वे ऐप आधारित कंपनियों के लिए एक सख्त गाइडलाइन और नीतिगत दिशा-निर्देश जारी करें। इस नीति के तहत सुनिश्चित किया जाए कि ईंधन की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का पूरा बोझ अकेले वर्कर्स पर न डाला जाए, बल्कि कंपनियां भी इसमें हिस्सेदारी निभाएं। अंत में यूनियन ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को होने वाला यह सामूहिक विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा, जिसका एकमात्र उद्देश्य अपनी आर्थिक बदहाली की आवाज को बहरी हो चुकी कंपनियों और शासन तक पहुंचाना है।

Read More: Dollar vs Rupee : डॉलर के मुकाबले ₹96 के पार पहुंचा भारतीय रुपया, आम जनता पर बढ़ेगी महंगाई की मार

Thetarget365

Recent Posts

Ambikapur News: अंबिकापुर कांग्रेस दफ्तर में फिर हुई बड़ी वारदात, जानिए चोरों ने क्या-क्या उड़ाया?

Ambikapur News:  छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले इलाके…

28 minutes ago

Putin Xi Jinping Talks : ट्रंप के बीजिंग दौरे से हिला वैश्विक शक्ति संतुलन, पुतिन करेंगे जिनपिंग से सीधी बात

Putin Xi Jinping Talks :  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चीन दौरे ने पूरी…

35 minutes ago

Japan Earthquake : जापान में आया 6.7 तीव्रता का भीषण भूकंप, थम गए हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनों के पहिये

Japan Earthquake : जापान में शुक्रवार को एक बार फिर धरती डोल उठी, जिससे देश…

41 minutes ago

Dollar vs Rupee : डॉलर के मुकाबले ₹96 के पार पहुंचा भारतीय रुपया, आम जनता पर बढ़ेगी महंगाई की मार

Dollar vs Rupee : भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए आज का दिन बेहद…

1 hour ago

Dhar Bhojshala Case : भोजशाला को कोर्ट ने माना मंदिर, जानिए मस्जिद पक्ष को लेकर क्या आया आदेश

Dhar Bhojshala Case : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर…

4 hours ago

Chhattisgarh Politics : भूपेश बघेल का भाजपा पर तीखा हमला, पुराने नेताओं को दूध की मक्खी की तरह फेंका

Chhattisgarh Politics : छत्तीसगढ़ के भिलाई में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश…

5 hours ago

This website uses cookies.