अंतरराष्ट्रीय

Global Hunger: मिडिल ईस्ट की जंग से दुनिया में हाहाकार, 4.5 करोड़ लोगों पर अकाल का खतरा, WFP की डरावनी चेतावनी

Global Hunger: संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने एक भयावह रिपोर्ट जारी करते हुए दुनिया को आगाह किया है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए “डेथ वारंट” साबित हो सकता है। WFP के अनुसार, दुनिया पहले से ही जलवायु परिवर्तन, स्थानीय संघर्षों और अकाल जैसी समस्याओं से जूझ रही है, जिसके कारण लगभग 32 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। लेकिन यदि मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो साढ़े 4 करोड़ अतिरिक्त लोग भुखमरी की कगार पर पहुँच जाएंगे। यह संकट आधुनिक इतिहास के सबसे भीषण खाद्य संकटों में से एक बन सकता है।

महंगाई की दोहरी मार: ईंधन और खाद्यान्न की कीमतों में भारी उछाल

जिनेवा में पत्रकारों से बात करते हुए WFP के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कार्ल स्काउ ने बताया कि यह युद्ध अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष का सबसे तात्कालिक और घातक प्रभाव वैश्विक बाजार में ईंधन और भोजन की कीमतों पर पड़ा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे आम आदमी की थाली से बुनियादी राशन भी दूर होता जा रहा है। स्काउ ने चेतावनी दी कि यदि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो गरीब देशों में रोटी के लिए दंगे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

सप्लाई चेन का टूटना: 28 फरवरी से शुरू हुआ तबाही का सिलसिला

गौरतलब है कि यह सैन्य संकट 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन छेड़ा। इसके बाद से ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) पूरी तरह चरमरा गई है। युद्ध क्षेत्र से गुजरने वाले व्यापारिक मार्ग असुरक्षित हो गए हैं, जिससे न केवल तैयार माल बल्कि कृषि उत्पादों और कच्चे माल की आवाजाही भी बाधित हुई है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों के बंद होने या मार्ग बदलने से रसद का खर्च कई गुना बढ़ गया है, जिसका खामियाजा दुनिया के सबसे पिछड़े इलाकों को भुगतना पड़ रहा है।

अफ्रीकी देशों पर संकट के बादल: खाद की कमी और कृषि उत्पादन में गिरावट

विश्व खाद्य कार्यक्रम की रिपोर्ट में एक विशेष चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर जताई गई है। इस जलमार्ग से उर्वरकों (Fertilizers) की आपूर्ति बाधित होने के कारण अफ्रीकी देशों में खेती-किसानी ठप होने की कगार पर है। खाद की कमी का मतलब है आगामी सीजन में फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट, जो सीधे तौर पर अकाल को निमंत्रण देगा। सोमालिया, अफगानिस्तान और यमन जैसे देश, जो पहले से ही मानवीय सहायता पर निर्भर थे, वहां परिस्थितियां अब नियंत्रण से बाहर होती दिख रही हैं।

भविष्य की डरावनी तस्वीर: जून तक जंग चली तो मचेगा हाहाकार

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध जून 2026 तक जारी रहा, तो मानवीय त्रासदी को रोकना नामुमकिन होगा। 4.5 करोड़ नए लोगों का भुखमरी की चपेट में आना वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्थिरता के लिए एक बड़ा झटका होगा। डब्लूएफपी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और महाशक्तियों से अपील की है कि वे युद्ध को रोकने और मानवीय गलियारों को खोलने के लिए तत्काल कदम उठाएं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो युद्ध की गोलियों से ज्यादा लोग भूख की वजह से अपनी जान गंवा सकते हैं।

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