Global Peace Index 2026: सबसे शांत देश, भारत पीछे, पाकिस्तान अमेरिका की स्थिति चौंकाने वाली

वैश्विक शांति सूचकांक 2026 की नई रिपोर्ट ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है क्योंकि इसमें सबसे शांत और अस्थिर देशों की चौंकाने वाली रैंकिंग सामने आई है भारत की स्थिति अपेक्षा से कमजोर और पाकिस्तान अमेरिका की स्थिति और भी नीचे दर्ज हुई जानकर सभी हैरान रह गए…

Global Peace Index 2026:  दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के बीच इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ‘ग्लोबल पीस इंडेक्स’ (GPI) 2026 ने वैश्विक शांति की एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। इस सूची में भारत को 163 देशों में 127वां स्थान प्राप्त हुआ है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष (2025) भारत इस सूची में 115वें स्थान पर था, जिससे स्पष्ट होता है कि शांति के पैमाने पर भारत की रैंकिंग में 12 पायदान की गिरावट आई है। यह गिरावट देश के सामाजिक और सुरक्षा परिवेश पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है, जहाँ आंतरिक और बाहरी संघर्षों के साथ-साथ अपराध दर और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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दक्षिण एशिया और शांतिपूर्ण देशों का वैश्विक परिदृश्य

दक्षिण एशियाई क्षेत्र की बात करें तो भारत अपने पड़ोसी देशों की तुलना में काफी पीछे नजर आता है। भारत का पड़ोसी देश भूटान इस सूची में 16वें स्थान के साथ दक्षिण एशिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है। वहीं, श्रीलंका ने अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए 67वां स्थान हासिल किया है, जो उसे इस क्षेत्र का दूसरा सबसे शांतिपूर्ण देश बनाता है। दक्षिण एशिया के अन्य देशों में नेपाल 111वें, बांग्लादेश 117वें, भारत 127वें, पाकिस्तान 152वें और अफगानिस्तान 157वें स्थान पर काबिज हैं। वैश्विक स्तर पर बात करें तो आइसलैंड ने अपनी बादशाहत कायम रखी है और वह लगातार 19वें वर्ष दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है। उसके बाद न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, स्लोवेनिया और आयरलैंड का स्थान आता है।

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अमेरिका की गिरती रैंकिंग: सुरक्षा पर उठते सवाल

GPI 2026 की रिपोर्ट में अमेरिका की रैंकिंग काफी चौंकाने वाली है। अमेरिका इस सूची में 134वें स्थान पर है, जो इसे भारत, वेनेजुएला और लेबनान जैसे देशों से भी पीछे खड़ा करता है। इसके विपरीत, चीन की रैंकिंग 118वीं है। दिलचस्प बात यह है कि जहां पूरी दुनिया से लोग अमेरिका को अपना पसंदीदा ठिकाना मानते हैं, वहीं अब बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक अपने देश के बढ़ते अपराध दर, आर्थिक अस्थिरता और जीवन की गुणवत्ता के कारण विदेश जाकर बसने का मन बना रहे हैं। गैलप पोल के अनुसार, करीब 21% अमेरिकी विदेश में बसने की इच्छा रखते हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।

शांति मापने के प्रमुख मानक और आधार

ग्लोबल पीस इंडेक्स तैयार करने के लिए IEP ने देशों का मूल्यांकन तीन मुख्य मापदंडों पर किया है: चल रहे घरेलू व अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, सामाजिक सुरक्षा और सैन्यीकरण (Militarization)। ‘चल रहे संघर्ष’ के अंतर्गत देशों की बाहरी और आंतरिक लड़ाईयों व उनकी भूमिका का विश्लेषण किया गया। ‘सामाजिक सुरक्षा’ को परखने के लिए हत्या की दर, राजनीतिक आतंक, हिंसक प्रदर्शनों और अपराधों की धारणा को आधार बनाया गया। अंत में, ‘सैन्यीकरण’ के तहत जीडीपी के अनुपात में सैन्य खर्च और हथियारों की उपलब्धता व सुलभता जैसे गंभीर कारकों पर गौर किया गया। यह इंडेक्स स्पष्ट करता है कि शांति केवल युद्ध न होने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समावेशी सामाजिक सुरक्षा और नीतिगत स्थिरता का परिणाम है, जिसकी कमी आज कई शक्तिशाली देशों में भी देखी जा रही है।

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Chandan Das

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