Gold-Silver Rate 31 Jan
Gold-Silver Rate 31 Jan: भारतीय सर्राफा बाजार के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक काले अध्याय की तरह दर्ज किया गया। वैश्विक बाजारों में मची भारी उथल-पुथल के बीच घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में ऐसी गिरावट देखी गई, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में मची हलचल और राष्ट्रपति की लॉबी की सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं के समीकरण बदल दिए हैं। इस अप्रत्याशित कमी ने जहाँ निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, वहीं शादी-ब्याह के सीजन की तैयारी कर रहे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में आया यह भूचाल आने वाले कई हफ्तों तक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
शुक्रवार को भारतीय बाजार ने वह मंजर देखा जो इस सदी में अब तक नहीं देखा गया था। सोने की कीमतों में प्रति 10 ग्राम 32,000 रुपये और चांदी में प्रति किलो 1,27,000 रुपये की भारी-भरकम कटौती दर्ज की गई। इतनी बड़ी गिरावट ने न केवल स्थानीय व्यापारियों को बल्कि वैश्विक स्तर के बड़े फंड हाउसों को भी चौंका दिया है। ऊंचे स्तरों पर बैठी मुनाफावसूली ने ऐसा दबाव बनाया कि बाजार पूरी तरह धराशायी हो गया। निवेशकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है और हर कोई अपनी पोजीशन से बाहर निकलने की कोशिश में लगा हुआ है।
भारतीय कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर स्थिति इतनी गंभीर थी कि ट्रेडिंग के दौरान सोने और चांदी, दोनों धातुओं पर बार-बार लोअर सर्किट लगाना पड़ा। शुक्रवार रात 12 बजे तक MCX पर चांदी की फरवरी वायदा कीमत गिरकर 3 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चौंकाने वाली बात यह रही कि इन गिरते भावों पर भी बाजार में केवल बिकवाल ही सक्रिय थे; खरीदार पूरी तरह से नदारद रहे। गौरतलब है कि कुछ ही समय पहले चांदी 4.27 लाख रुपये और सोना 1.82 लाख रुपये के अपने ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गए थे।
इस वैश्विक मंदी की शुरुआत अमेरिका से हुई। गुरुवार रात अमेरिकी बाजारों में शुरू हुई बिकवाली का असर शुक्रवार को पूरी दुनिया के बाजारों पर महसूस किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लॉबी द्वारा की गई भारी बिकवाली ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की वायदा कीमत में 900 डॉलर की भीषण गिरावट आई, जिससे भाव 5,625 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से लुढ़क कर 4,702 डॉलर पर आ गए। इस राजनीतिक दबाव ने सोने को एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में कमजोर कर दिया है।
सोने की तुलना में चांदी की हालत और भी खराब रही। न्यूयॉर्क के बाजारों में चांदी की वायदा कीमत 75 डॉलर प्रति औंस तक गिर गई, जो गुरुवार तक 121.75 डॉलर पर ट्रेड कर रही थी। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह लगभग 38% की गिरावट है। जनवरी के महीने में चांदी ने जिस तरह से 50% की तेजी दिखाई थी, उतनी ही तेजी से अब मुनाफावसूली ने इसे नीचे गिरा दिया है। यह चांदी के इतिहास की सबसे तेज और बड़ी गिरावटों में से एक है, जिसने सट्टेबाजों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
केवल कीमती धातुएं ही नहीं, बल्कि औद्योगिक धातुओं (Industrial Metals) के बाजार में भी हाहाकार मचा रहा। शुक्रवार को तांबा, एल्युमिनियम और जिंक जैसी महत्वपूर्ण धातुओं की कीमतों में 3 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक मंदी की आहट और औद्योगिक मांग में कमी की आशंका ने पूरे मेटल इंडेक्स को लाल निशान में धकेल दिया है। इस चौतरफा गिरावट ने वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector) की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।
पिछले कई महीनों से सोने और चांदी की आसमान छूती कीमतों के कारण खुदरा बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ था। कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर होने के कारण आम आदमी ने खरीदारी से दूरी बना ली थी। लेकिन अब इस भारी गिरावट ने मध्यमवर्गीय परिवारों और शादियों के लिए जेवर बनवाने वालों को एक नई उम्मीद दी है। सर्राफा व्यापारियों और कारीगरों का मानना है कि कीमतों में आई इस कमी से अब शादियों के सीजन में खुदरा ग्राहकी दोबारा शुरू होगी, जो पिछले कई महीनों से ठप पड़ी थी।
बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों में जो एकतरफा तेजी का दौर चल रहा था, वह अब खत्म हो चुका है। कीमतों में 14 से 38 प्रतिशत की गिरावट के बाद फिलहाल किसी नई बड़ी तेजी की संभावना बहुत कम है। निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की स्पष्ट सलाह है कि वे फिलहाल बाजार में जल्दबाजी न करें। जब तक कीमतें एक निश्चित स्तर पर टिक नहीं जातीं और बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक नए निवेश से बचना ही समझदारी होगी।
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