Gold Silver Price
Gold Silver Price: भारतीय सर्राफा बाजार में आज यानी 18 मार्च 2026 की सुबह निवेशकों और खरीदारों के लिए बड़ी हलचल लेकर आई है। सोने की कीमतों में एक बार फिर जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है, जिसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जहां निवेशकों के लिए यह पोर्टफोलियो में मजबूती का संकेत है, वहीं आम जनता और विशेषकर उन परिवारों के लिए बड़ी चिंता का विषय है जिनके घरों में शादियों का सीजन आने वाला है। वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू मांग के बीच सोने के भाव ने आज एक नया शिखर छुआ है, जिससे गहनों की खरीदारी अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती नजर आ रही है।
देश के प्रमुख शहरों में सोने के दाम आसमान छू रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत उछलकर 1,58,240 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। आर्थिक राजधानी मुंबई के साथ-साथ कोलकाता और चेन्नई में भी लगभग यही स्थिति है, जहां 24 कैरेट सोना 1,58,090 रुपये के आसपास ट्रेंड कर रहा है। बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में भी कीमतें इसी उच्च स्तर पर स्थिर बनी हुई हैं। 22 कैरेट सोना, जिसका उपयोग मुख्य रूप से आभूषण बनाने में होता है, उसके भाव में भी प्रति 10 ग्राम 1000 रुपये से अधिक की वृद्धि देखी गई है।
सोने के साथ-साथ चांदी ने भी आज निवेशकों को चौंका दिया है। 18 मार्च को चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया और यह 2,50,100 रुपये प्रति किलोग्राम के पार निकल गई है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले सत्र में भी चांदी में 6000 रुपये से ज्यादा की तेजी देखी गई थी, जो इसकी बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम आपूर्ति को दर्शाती है। औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में चांदी की लोकप्रियता बढ़ने से इसके भाव में निरंतर मजबूती देखी जा रही है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं की इस बेतहाशा तेजी के पीछे तीन मुख्य वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:
मिडिल ईस्ट में युद्ध का संकट: इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में डर का माहौल पैदा कर दिया है। जब भी युद्ध की स्थिति बनती है, निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करना सुरक्षित समझते हैं।
कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। तेल महंगा होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर है।
महंगाई के विरुद्ध सुरक्षा: सोना हमेशा से महंगाई के खिलाफ एक बेहतर ‘हेज’ माना जाता रहा है। जब दुनिया भर के केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष करते हैं, तो सोने की मांग स्वतः बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसी तरह तनावपूर्ण बनी रहीं, तो सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की संभावना बहुत कम है। हालांकि, ऊंचे दामों के कारण स्थानीय स्तर पर गहनों की मांग में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती इसे और ऊपर ले जा सकती है। मिडिल ईस्ट से आने वाली खबरें और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले इस बात को तय करेंगे कि आने वाले हफ्तों में सोना 1.60 लाख के आंकड़े को पार करेगा या नहीं।
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