Bihar Politics
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। शपथ ग्रहण के बाद से ही उनके कड़े तेवरों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। सम्राट चौधरी ने एक बार फिर पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को पलटकर यह संकेत दे दिया है कि वे अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने बिहार के सियासी हलकों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वर्तमान सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य है या यह नेतृत्व परिवर्तन की नई दिशा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए हड़ताल के कारण निलंबित किए गए 224 राजस्व कर्मियों का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि 11 फरवरी 2026 से राजस्व कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। उस समय विजय सिन्हा भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग के मंत्री थे। उन्होंने कर्मचारियों की हड़ताल को घोर अनुशासनहीनता माना था और सख्त रुख अपनाते हुए अलग-अलग आदेशों के जरिए 224 कर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। अब सम्राट सरकार ने इन कर्मचारियों की मांगों और परिस्थितियों को देखते हुए पूर्व के उस आदेश को निरस्त करने का निर्देश जारी किया है।
सम्राट चौधरी ने केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के करियर से जुड़े एक और सख्त नियम को वापस ले लिया है। दरअसल, पूर्व की व्यवस्था में एक ऐसा आदेश पारित किया गया था, जिसके तहत सरकारी कर्मचारी अपने पूरे सेवाकाल के दौरान केवल एक बार ही किसी विभागीय या प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सकते थे। जिस समय यह आदेश जारी हुआ था, उस विभाग की कमान भी विजय सिन्हा के पास थी। सम्राट सरकार ने इस नियम को कर्मचारियों के भविष्य के लिए बाधक माना और इस पाबंदी को पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया है। नगर विकास विभाग ने इस संबंध में औपचारिक पत्र भी जारी कर दिया है।
6 अप्रैल को नगर विकास विभाग द्वारा जारी पुराने आदेश में यह प्रावधान था कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित सीमा से अधिक बार परीक्षा में शामिल होता है, तो उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। इस आदेश के बाद बिहार के विभिन्न कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त था। संगठनों का तर्क था कि यह फैसला न केवल मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि प्रतिभाशाली कर्मचारियों की पदोन्नति और करियर ग्रोथ की संभावनाओं को भी खत्म करने वाला है। कर्मचारियों ने सरकार से इस ‘कठोर’ नियम को वापस लेने के लिए लगातार दबाव बनाया था।
मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद बिहार के सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अब कर्मचारी अपनी नौकरी सुरक्षित रखते हुए अपनी योग्यता और शिक्षा के आधार पर ऊंचे पदों के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार भाग ले सकेंगे। कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि यह निर्णय बिहार के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाएगा।
यह दूसरी बार है जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय सिन्हा के फैसलों पर अपनी ‘कैंची’ चलाई है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि सम्राट चौधरी कर्मचारियों को साधकर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, जबकि विजय सिन्हा अनुशासन और सख्ती के समर्थक रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से इसे जनहित में लिया गया फैसला बताया जा रहा है, लेकिन बार-बार पूर्व डिप्टी सीएम के आदेशों का पलटना राज्य की एनडीए सरकार के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई अटकलों को जन्म दे रहा है। फिलहाल, कर्मचारियों के लिए यह मानसून सत्र से पहले किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है।
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