OTT Ban India
OTT Ban India: भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर परोसे जा रहे अश्लील कंटेंट के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। मंगलवार को एक बड़े फैसले के तहत मंत्रालय ने पांच प्रमुख ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। इस कार्रवाई की जद में आने वाले प्लेटफॉर्म्स में मूडएक्सवीआईपी (MoodXVIP), कोयल प्लेप्रो (Koyal PlayPro), डिजी मूवीप्लेक्स (Digi Movieplex), फील (Feel) और जुगनू (Jugnu) शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन एप्स पर दिखाए जा रहे कंटेंट की प्रकृति न केवल अमर्यादित थी, बल्कि समाज के नैतिक ढांचे के लिए भी हानिकारक थी।
सरकार द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई का मुख्य आधार नियमों की अनदेखी है। मंत्रालय के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट 2000 और आईटी नियम 2021 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर रही थी। इसके अलावा, कंटेंट में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 292 और महिलाओं के अश्लील प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम से जुड़े कानूनों की भी अवहेलना पाई गई। सरकार का तर्क है कि डिजिटल अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह कतई नहीं है कि प्लेटफॉर्म्स अश्लीलता और आपत्तिजनक सामग्री का प्रसार करें।
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले पिछले साल जुलाई में सरकार ने ‘उल्लू’ (Ullu) और ‘एएलटीटी’ (ALTT) सहित 25 अन्य स्ट्रीमिंग एप्स पर प्रतिबंध लगाया था। गौरतलब है कि एएलटीटी की शुरुआत 2017 में एकता कपूर द्वारा की गई थी, जबकि उल्लू एप को 2018 में विभु अग्रवाल ने विकसित किया था। मार्च 2024 में भी सरकार ने अश्लीलता फैलाने वाले 18 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, 19 वेबसाइट्स और दर्जनों सोशल मीडिया हैंडल्स को ब्लॉक किया था। यह निरंतर कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार अब डिजिटल स्पेस की स्वच्छता को लेकर समझौता करने के मूड में नहीं है।
सरकार ओटीटी कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए मुख्य रूप से चार कानूनी स्तंभों का सहारा लेती है:
आईटी एक्ट, 2000 (धारा 67): इंटरनेट पर अश्लील सामग्री प्रकाशित करने को अपराध मानता है।
धारा 67A: यौन गतिविधियों से जुड़े दृश्यों को ऑनलाइन पोस्ट करना गैरकानूनी बनाता है।
BNS 2023 (धारा 294): सार्वजनिक डिजिटल क्षेत्र में अभद्र भाषा और अश्लील कृत्यों के लिए दंड का प्रावधान है।
महिला अश्लील निषेध अधिनियम (1986): महिलाओं के अपमानजनक चित्रण को रोकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 के लॉकडाउन के दौरान जब लोगों की इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ी, तो इन एडल्ट कंटेंट वाले प्लेटफॉर्म्स की व्यूअरशिप में जबरदस्त उछाल देखा गया। मई 2020 में एएलटीटी की व्यूअरशिप में पिछले वर्ष की तुलना में 60% का इजाफा हुआ था। इसी समय के दौरान कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने अधिक ग्राहकों को लुभाने के लिए एडल्ट और बोल्ड कंटेंट का सहारा लेना शुरू किया, जिसने बाद में कानूनी संकट का रूप ले लिया।
डिजिटल सामग्री को विनियमित करने के लिए सरकार ने 2021 में ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स’ लागू किए थे, जिन्हें अप्रैल 2023 में और सख्त बनाया गया। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, हर ओटीटी प्लेटफॉर्म को दर्शकों की आयु के आधार पर कंटेंट की रेटिंग (U, U/A 7+, 13+, 16+, A) तय करना अनिवार्य है। साथ ही, हर प्लेटफॉर्म पर एक ‘ग्रीवांस ऑफिसर’ (शिकायत अधिकारी) की नियुक्ति अनिवार्य है, जो दर्शकों की शिकायतों का निपटारा कर सके। सरकार ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रविरोधी, अश्लील और बच्चों को नुकसान पहुँचाने वाला कोई भी कंटेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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