Salalah Port
Salalah Port: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की आग अब खाड़ी और अरब देशों तक फैल गई है। ताजा घटनाक्रम में, ईरान ने ओमान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सलालाह पोर्ट पर भीषण ड्रोन हमले किए हैं। ओमान टीवी और ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी फर्म ‘एम्ब्रे’ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया है कि ईरान का मुख्य निशाना तेल भंडारण और बुनियादी ढांचा था। यह हमला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
सलालाह पोर्ट पर हुए इस हमले का एक भयावह वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तेल स्टोरेज टैंकों से आग की लपटें और धुएं का काला गुबार उठता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान अब जानबूझकर एनर्जी साइट्स को अपना निशाना बना रहा है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाया जा सके। राहत की बात यह रही कि शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, बंदरगाह पर खड़े मर्चेंट जहाजों (व्यापारिक जहाजों) को इस हमले में कोई सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन बुनियादी ढांचे को काफी क्षति हुई है।
अपनी धरती पर हुए इस अप्रत्याशित हमले के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने तुरंत कड़े तेवर अपनाए हैं। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से संपर्क कर हमले पर अपनी गहरी नाराजगी और कड़ा विरोध दर्ज कराया। सुल्तान ने स्पष्ट किया कि ओमान इस पूरे क्षेत्रीय संघर्ष में एक ‘न्यूट्रल’ (तटस्थ) देश रहा है और उसकी शांतिप्रिय छवि पर इस तरह के हमले स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ओमान अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जाने और जरूरी कदम उठाने को तैयार है।
यह हमला कूटनीतिक रूप से एक अजीबोगरीब समय पर हुआ है। हाल ही में ओमान के सुल्तान ने मुज्तबा खामेनेई को ईरान का नया ‘सुप्रीम लीडर’ चुने जाने पर बधाई संदेश भेजा था। द टाइम्स ऑफ इजरायल ने भी इस बधाई की पुष्टि की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ओर जहां कूटनीतिक शिष्टाचार निभाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर युद्ध के मैदान में ईरान की आक्रामकता ने ओमान जैसे मध्यस्थ देश को भी युद्ध की लपटों में झोंक दिया है।
ईरान और अमेरिका के बीच ओमान लंबे समय से एक सेतु का काम करता रहा है और लगातार बीच-बचाव के प्रयास करता रहा है। लेकिन सलालाह पोर्ट पर हुए हमले और होर्मुज स्ट्रेट के पास तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुई फायरिंग ने शांति की इन कोशिशों को नाकाम कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यहां जहाजों पर होने वाले हमलों का सीधा असर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि अब यह लड़ाई केवल इजरायल और हमास या हिजबुल्लाह तक सीमित नहीं रही है। ईरान सीधे तौर पर खाड़ी देशों के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ईरान की यह रणनीति पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है। यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो ओमान जैसे शांतिप्रिय देशों का भी इस युद्ध में सीधे तौर पर खिंच जाना तय माना जा रहा है, जिससे तृतीय विश्व युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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